NDTV-Dettol Banega Swasth Swachh India NDTV-Dettol Banega Swasth Swachh India
  • Home/
  • ताज़ातरीन ख़बरें/
  • मिलिए एक ऐसे डॉक्टर से, जिसने मैटरनिटी वार्ड में मातृ मृत्यु दर के बढ़ते मामलों को किया कम

ताज़ातरीन ख़बरें

मिलिए एक ऐसे डॉक्टर से, जिसने मैटरनिटी वार्ड में मातृ मृत्यु दर के बढ़ते मामलों को किया कम

माताओं की जान बचाने वाले उस डॉक्टर से मिलें जिन्होंने हाथों की स्वच्छता (hand hygiene) पर जोर दिया

Read In English
हाथ धोने से कैसे बची माताओं की जान: वह डॉक्टर जिसने मैटरनिटी वार्ड में मातृ मृत्यु दर के बढ़ते हुए मामलों को किया कम
डॉ. इग्नाज सेमेल्विस (Dr Ignaz Semmelweis) का जन्म 1818 में हंगरी में हुआ था

नई दिल्ली: एक बार उस दौर के बारे में कल्पना कीजिए: वो दौर था 1847 का, जब वियना जनरल अस्पताल के मैटरनिटी वार्ड डेंटिस्ट के पास जाने से भी ज्यादा डरावने लगते थे. महिलाएं वहां अपने बच्चे को जन्म देने से घबराती थीं. यह वार्ड चाइल्डबेड फीवर के मामलों से भरा था, एक ऐसा घातक संक्रमण (deadly infection) जिसने हाल ही में मां बनी कई महिलाओं की जान ले ली. सोचिए हालात कितने भयानक थे कि अस्पताल में भर्ती उन महिलाओं में से 13 से 18 फीसदी अस्पताल से बाहर नहीं आ पाई.

इसे भी पढ़े: बुक रिकमेंडेशन – पीट द किटी: वॉश योर हैंड्स

माताओं को बचाने का एक आसान लेकिन रेवोल्यूशनरी आइडिया: हाथ धोना (Handwashing)!

आप मानो या न मानो, हाथ धोना हमेशा से एक आम बात नहीं थी. मूंछों, मोती जैसी आंखों और गंजे सिर वाले इग्नाज सेमेल्विस नाम के एक व्यक्ति ने हाथ धोने की उस तकनीक को शुरू किया, जिसका आज अरबों लोग पालन करते हैं.

1818 में हंगरी में जन्मे डॉ. सेमेल्विस ने खुद को वियना के उस जनरल अस्पताल में पाया, जो मातृ मृत्यु दर के बढ़े हुए मामलों (high maternal mortality rate) से जूझ रहा था. ध्यान दें, यह प्री-जर्म थ्योरी (pre-germ theory) का युग था और चिकित्सा समुदाय (medical community) का मानना था कि खराब हवा बीमारी का कारण बनती है. उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि असली वजह ठीक उनके सामने है – या यूं कहें कि, उनके हाथों में है.

डॉ. सेमेल्विस ने देखा कि डॉक्टर और मेडिकल स्टूडेंट, शवों की ऑटोप्सी के बाद, अपने हाथ धोए बिना सीधे दूसरी महिलाओं की डिलीवरी कराने चले गए. इस बीच, दाइयां (midwives), जिन्हें शवों की ऑटोप्सी सेशन का हिस्सा नहीं बनना पड़ा, उनके वार्ड में कम मौतें हुईं.

इन दोनों मामलों को देखते हुए डॉ. सेमेल्विस ने एक निष्कर्ष निकाला. डॉक्टर ऑटोप्सी सेशन के दौरान गंदे हुए हाथों से ही प्रसव करा रहे थे. डॉ. सेमेल्विस ने ये सब देखकर एक नियम अनिवार्य कर दिया. उस नियम के मुताबिक, मरीजों की जांच करने से पहले क्लोरिनेटेड लाइम (chlorinated lime) से हाथ धोना अनिवार्य था.

और बस इस एक नियम से कुछ ही महीनों में मृत्यु दर कम हो गई. 1847 के अंत तक, मृत्यु दर में आई यह गिरावट किसी चमत्कार से कम नहीं थी.

डॉ. सेमेल्विस ने जो खोज की वह एक शाश्वत सत्य (timeless truth) है: हाथ धोना सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है. यह फ्लू, बीमारी को फैलने से रोक सकता है और संक्रमण को दूर रख सकता है. और यही वजह है कि डॉ. सेमेल्विस हाथ धोने के प्रणेता या जनक कहे जाते हैं. उन्हें हमेशा उस व्यक्ति के रूप में याद किया जाता है जिन्होंने हाथों को स्वच्छ रखने का महत्व समझाया.

This website follows the DNPA Code of Ethics

© Copyright NDTV Convergence Limited 2024. All rights reserved.