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जलवायु परिवर्तन

कम पानी, ज्यादा उपज: अर्थशॉट पुरस्कार विजेता ‘ग्रीनहाउस-इन-ए-बॉक्स’ छोटे किसानों को जलवायु परिवर्तन से होने वाले प्रभावों को कम करने में कर रहा है मदद

खेती (Kheyti) का ग्रीनहाउस-इन-द-बॉक्स किसानों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और खेती को ज्यादा सस्टेनेबल और जलवायु परिवर्तन से होने वाले प्रभावों से बचाते हुए उनकी इनकम बढ़ाने में मदद करता है

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Less Water, More Yield Earthshot Prize Winning ‘Greenhouse-In-A-Box’ Is Helping Smallholder Farmers Mitigate The Effects Of Climate Change
ग्रीनहाउस पौधों के लिए एक घर की तरह है, जो उन्हें मौसम में भारी उतार-चढ़ाव से बचाता है

नई दिल्ली: राजस्थान में जयपुर के इसरावाला गांव के 38 साल के अर्जुन पलसानिया (Arjun Palsaniya) के लिए 2023 में कृषि का मौसम अच्छा रहा. उन्होंने जमीन के एक टुकड़े (एक एकड़ के सोलहवें हिस्से) पर उगाए गए खीरे बेचकर 75,000 रुपये कमाए. वो अपनी अच्छी फसल का श्रेय एक ट्रांसपेरेंट सफेद रंग के स्ट्रक्चर को देते हैं जिसे ग्रीन हाउस कहा जाता है. इसने उनकी फसल को संक्रमण और मौसम में भारी बदलाव – गर्मी, बारिश और ओलावृष्टि से बचाया. पलसानिया, जो पिछले 15 सालों से खेती कर रहे हैं, उन्होंने कहा,

अगर मैंने पुराने तरीके से, खुले खेत में खीरा उगाया होता, तो मैं मुश्किल से 10,000 रुपये कमा पाता क्योंकि खीरे की बेल एक महीने में ही मर जाती. जबकि, ग्रीन हाउस में, फसल तीन महीने तक चली, जिसके चलते अच्छी फसल हुई.

कम पानी, ज्यादा उपज: अर्थशॉट पुरस्कार विजेता 'ग्रीनहाउस-इन-ए-बॉक्स' छोटे किसानों को जलवायु परिवर्तन से होने वाले प्रभावों को कम करने में कर रहा है मदद

राजस्थान में Kheyti के ग्रीनहाउस के अंदर अंग्रेजी खीरे की फसल लहलहा रही है

यह स्ट्रक्चर एक स्टार्टअप और 2022 अर्थशॉट पुरस्कार विजेता, Kheyti द्वारा स्टेब्लिश किया गया है. जब पूछा गया कि Kheyti का ग्रीन हाउस क्या है, Kheyti के को-फाउंडर और CEO कौशिक कप्पागंतुलु (Kaushik Kappagantulu) ने बताया,

जिस तरह इंसानों के पास खुद को बचाने के लिए घर होते हैं, उसी तरह पौधों को भी एक घर की जरूरत होती है, खासकर ऐसी दुनिया में जो जलवायु परिवर्तन के मामले में और भी बदतर होती जा रही है. ग्रीनहाउस पौधों के लिए एक घर है. यह किसानों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में मदद करता है और खेती को ज्यादा सस्टेनेबल बनाते हुए उनकी इनकम में बढ़ोतरी करता है.

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इस आइडिया की शुरुआत एक दशक पहले हुई थी, जब कौशिक एक एंटरप्राइज के लिए काम कर रहे थे और भारत भर के गांवों का दौरा कर रहे थे, जिससे स्कूल छोड़ने वाले बच्चों को आजीविका और नौकरियां मिलने में मदद मिल सके. उन्होंने याद करते हुए कहा,

जिन बच्चों की हम मदद करने की कोशिश कर रहे थे उनमें से ज्यादातर किसान परिवारों से थे. चूंकि खेती से कमाई नहीं हो रही थी, इसलिए वे दूसरी इंडस्ट्रीज में जा रहे थे. यहीं से इस आइडिये की प्रेरणा मिली कि हमें किसानों को उनकी इनकम बढ़ाने में मदद करनी चाहिए. और, तभी मैं अपने को-फाउंडर्स से मिला जो इसी तरह के आइडिये के बारे में सोच रहे थे.

दिसंबर 2015 में, इस टीम ने किसानों की समस्याओं को समझने और उनकी इनकम में सुधार करने के लिए छह महीने का निवेश करने के इरादे से Kheyti को लॉन्च किया. हजारों किसानों के साथ बातचीत करके और खेतों में लंबा वक्त बिताने के बाद, उन्हें समस्या की जड़ मिल गई – कि कड़ी मेहनत के बावजूद, खेती का भाग्य मौसम के हाथों में होता है. तभी Kheyti ने छोटे किसानों के लिए खेती को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाने का फैसला किया.

कम पानी, ज्यादा उपज: अर्थशॉट पुरस्कार विजेता 'ग्रीनहाउस-इन-ए-बॉक्स' छोटे किसानों को जलवायु परिवर्तन से होने वाले प्रभावों को कम करने में कर रहा है मदद

राजस्थान के एक खेत में सेटअप किया Kheyti का ग्रीनहाउस

कौशिक ने समझाया,

विकसित देशों में किसानों के लिए जलवायु परिवर्तन के अनुकूल और अपनी खेती को ज्यादा सस्टेनेबल बनाने के लिए कई तरह की टेक्नोलॉजी और सॉल्यूशंस मौजूद हैं. लेकिन, वे सॉल्यूशंस भारत के छोटे और सीमांत किसानों के लिए उपयुक्त नहीं हैं, जिनके पास पांच एकड़ से भी कम जमीन होती है और देश की कुल कृषि में 85 प्रतिशत का योगदान देते हैं. क्योंकि ये सॉल्यूशंस महंगे होते हैं और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग भी उनके पास नहीं होती है.

टीम को इस समस्या से निपटने के जो सॉल्यूशन अच्छे लगे उनमें से एक ग्रीनहाउस था. उन्होंने भारत के छोटे किसानों के लिए ग्रीन हाउस का एक कॉम्पैक्ट और अफोर्डेबल वर्जन बनाने का निर्णय लिया. एक साल के रिसर्च और डेवलपमेंट के बाद, Kheyti के ग्रीनहाउस का पहला वर्जन जनवरी 2017 में 3 लाख रुपये की कीमत पर लॉन्च किया गया. इस टेक्नोलॉजी की कीमत रेगुलर ग्रीनहाउस की तुलना में 25 फीसदी कम थी, लेकिन फिर भी महंगी थी.

हमारा पहला ग्रीनहाउस किसानों के एक समूह के साथ मिलकर डिजाइन किया गया था. वे इसके पहले एडोप्टर बन गए क्योंकि ग्रीनहाउस में जो वो चाहते थे वैसे ही इनपुट दिए थे. इसके आठवें वर्जन तक आते-आते 500 से ज्यादा किसान डिजाइन प्रोसेस का हिस्सा बन चुके थे और हम इसकी कीमत को कम करके 3 लाख रुपये से 65,000 रुपये तक लाने में कामयाब रहे.

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जुलाई 2022 में अर्जुन पलसानिया अपने गांव में अपनी जमीन पर ग्रीनहाउस-इन-द-बॉक्स इंस्टॉल करने वाले पहले व्यक्ति थे. उन्होंने अपने अनुभव के बारे में कहा,

ग्रीन हाउस के अंदर उगाई जाने वाली फसलों को कम पानी की जरुरत होती है और उपज ज्यादा होती है. चूंकि वे सीधे तेज धूप के संपर्क में नहीं आती हैं, इसलिए फसलें सूखती नहीं हैं. इसी तरह, वे सीधे ओलावृष्टि से भी सुरक्षित रहती हैं. फसल तेज बारिश के पानी से सीधे भीगती भी नहीं है; स्ट्रक्चर की छत से पानी रिसता है लेकिन इससे फसल को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है.

ग्रीनहाउस खासतौर से – फल, सब्जियां, फूल और सजावटी पेड़ों को उगाने लिए उपयुक्त है. इसमें स्वपरागण (self-pollinated) और पार्थेनोकार्पिक (बिना निषेचन के फल का विकास) फसलों की किस्मों को उगाने की सलाह दी जाती है. कृषि विज्ञान के बारे में बताते हुए, रांची स्थित Kheyti में किसान सेवा सहयोगी उज्जवल रंजन ने कहा,

चूंकि यह एक बॉक्स है, घरेलू मक्खी या मधुमक्खी इसमें अंदर नहीं जा सकती, इसलिए परागण प्रभावित होता है. यही वजह है कि, हम ऐसी फसलें उगाने का सुझाव देते हैं जो स्व-परागण (self-pollinated) हैं या जिन्हें परागण की आवश्यकता नहीं होती है, जैसे कि फीमेल फ्लावर (female flowers) जो सीधे फल देते हैं. हम टमाटर, शिमला मिर्च, बैंगन और फ्रेंच बीन्स जैसी फसलें उगाने का सुझाव देते हैं.

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बॉक्स में ड्रिप इरिगेशन सिस्टम (drip irrigation system) है, जिसके चलते पानी की कम जरूरत होती है.

पलसानिया ने अपनी फसल में जो वृद्धि देखी, उसे देखते हुए, उनके गांव के दूसरे किसानों ने भी Kheyti के ग्रीन हाउस को अपने खेतों में इंस्टॉल कर लिया. अर्जुन जैसे किसान Kheyti के ब्रांड एंबेसडर बन गए हैं, जो अपने अनुभव और डेमोस्ट्रेशन से Kheyti का प्रमोशन कर रहे हैं.

कई किसान, उत्पादक संगठन और गैर-सरकारी संगठन, जिन्होंने इस समाधान पर विश्वास जताया है, वे भी किसानों को इस कम लागत वाले, मॉड्यूलर, जलवायु अनुकूल समाधान के बारे में शिक्षित कर रहे हैं.

इसका स्ट्रक्चर मॉड्यूलर होने का मतलब है कि यदि कोई किसान ग्रीन हाउस का साइज बढ़ाना चाहता है, तो मौजूदा सेट में एक और सेट जोड़ा जा सकता है. इस तरह, आधा एकड़ भूमि को कवर करने के लिए 8 ग्रीनहाउस को जोड़ा जा सकता है. कौशिक ने कहा,

लगभग 20 प्रतिशत किसानों ने पहले के बाद दूसरा ग्रीनहाउस भी खरीदा है और लगभग 10 प्रतिशत ने बेहतर फसल के लिए तीसरे और चौथे ग्रीनहाउस को खरीदने का विकल्प चुना. ग्रीनहाउस को ट्रेनिंग इनपुट और एक सपोर्ट सिस्टम के साथ जोड़ा गया है. हमारे किसान सेवा सहयोगी (farmer service associates) इस टेक्नोलॉजी को इस्तेमाल करने के लिए किसानों का मार्गदर्शन करने के लिए मौजूद रहते हैं.

वर्तमान में, Kheyti तेलंगाना, मध्य प्रदेश, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश पर खास फोकस के साथ, सात राज्यों में 3,200 किसानों को सेवाएं प्रदान कर रहा है.

हम हर महीने लगभग 200 किसानों को जोड़ रहे हैं और अगले 18 से 24 महीनों में इसमें काफी बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं. 2032 तक, हमारा लक्ष्य दस लाख किसानों तक पहुंचना है. ज्यादा राज्यों में विस्तार करने के बजाय, हम गहराई तक जाने की योजना बना रहे हैं. हम किसानों से अपनी जमीन पर फसलें उगाने से रोकने के लिए नहीं कह रहे हैं. हम उन्हें इनकम का एक डायवर्स और स्टेडी सोर्स प्रदान कर रहे हैं जो मौसम में भारी उतार-चढ़ाव का सामना कर सकता है.

आगे बढ़ते हुए, जलवायु अनुकूल कृषि संगठन Kheyti का लक्ष्य ऐसे और समाधान पेश करना है, जो किसानों की इनकम को बेहतर बनाने पर फोकस हों. Kheyti ग्रीनहाउस के साथ, छोटे किसान जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए कमान अपने हाथों में ले रहे हैं.

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