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गुजरात के दीपेन गढ़िया ने कोविड की दूसरी लहर के दौरान कुछ यूं किया सोशल मीडिया का इस्तेमाल

गुजरात के जूनागढ़ के 23 वर्षीय दीपेन गढ़िया ने कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान चिकित्सा के संसाधनों की आपूर्ति कराने वालों को लेकर वैध और वेरिफाइड जानकारी जुटाने की भरपूर कोशिश की, ताकि समय रहते जरूरतमंद लोगों तक सही जानकारी पहुंच सके

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गुजरात के दीपेन गढ़िया ने कोविड की दूसरी लहर के दौरान कुछ यूं किया सोशल मीडिया का इस्तेमाल
Highlights
  • दीपेन ने सूचना का एक डेटाबेस बनाया, जो मरीजों के लिए काफी उपयोगी है
  • उनकी ऑनलाइन पहल 'कोविड रिसोर्सेज' ने हजारों लोगों की मदद की है
  • महामारी के दौरान, हमने युवाओं को चुनौती में भी आगे बढ़ते देखा: यूनिसेफ

नई दिल्ली: भारत में कोविड-19 की दूसरी लहर, जिसमें कोरोनोवायरस संक्रमण के मामलों में में खतरनाक उछाल देखा गया, के कारण कई जगहों पर स्वास्थ्य सेवा प्रणाली चरमरा गई और देशभर में जो तबाही हुई, उसे शायद ही पहले किसी ने देखा हो. इस दौरान अस्पतालों में बिस्तरों और ऑक्सीजन की आपूर्ति में कमी से लेकर दवाओं, चिकित्सा सुविधाओं और समय पर उपचार की कमी तक देखने को मिली. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मदद के लिए बेताब चीखों को साफ देखा और सुना जा सकता था. इस दौरान गुजरात के जूनागढ़ के 23 वर्षीय राजनीति विज्ञान के छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता दीपेन गढ़िया ने लोगों तक सही और पुख्‍ता जानकारी जल्दी पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया पर चल रही जानकारियों की जांच करना शुरू किया. इसके बाद उन्‍होंने चिकित्सा संसाधन आपूर्तिकर्ताओं और अस्पताल में सुविधाओं का रियल टाइम डेटाबेस प्रदान करने के लिए एक वेबसाइट शुरू की.

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महामारी के दौरान अपने काम के बारे में एनडीटीवी से बात करते हुए, दीपेन ने एक घटना को याद करते हुए बताया कि जब उनके दोस्त को अपने दादा-दादी के लिए तत्काल ऑक्सीजन की जरूरत थी. उन्होंने उनके संदेश को अपने दोस्तों और कुछ व्हाट्सएप ग्रुपों में भेजा, जिसका वह हिस्सा थे. उन्हें सप्लायर्स के बहुत सारे फोन नंबर मिले, लेकिन वह समय पर ऑक्सीजन की व्यवस्था करने में विफल रहे और उनके दोस्त ने अपने दोनों दादा-दादी को खो दिया.

दीपेन ने कहा, ऐसा उस समय इसलिए हुए, क्योंकि हमने अपना कीमती समय असत्यापित नंबरों पर कॉल करने पर खो दिया. भले ही हमारे शहर का मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर बहुत दबाव में था, मेरा मानना है कि अगर हमारे पास उन सप्लायर्स के बारे में सही जानकारी होती, जिनके पास उस समय ऑक्सीजन उपलब्ध थी, तो हम अपने दोस्त के दादा-दादी को बचा सकते थे. हमारे शहर में मेडिकल ऑक्सीजन की भारी कमी थी. उसी शाम मुझे पता चला कि हमारे शहर में कोविड से 30 लोगों की मौत हो गई और उनमें से आधे ऑक्सीजन की कमी के कारण जान गवां बैठे. यह मेरे लिए एक कठिन पल था, जिसने मुझे कुछ ऐसा करने के लिए प्रेरित किया, ताकि लोगों तक ऑक्सीजन समय रहते पहुंच जाए, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए.

उन्होंने आगे कहा कि एक सामाजिक कार्यकर्ता होने के नाते वह सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर कई पहल और समूहों का हिस्सा हैं. दीपेन एक गैर-सरकारी संगठन सेंसिज़ेंस ट्रस्ट – सेंसिबल सिटिज़न्स के संस्थापक भी हैं, जो नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए काम करते हैं और युवाह (जेनरेशन अनलिमिटेड इंडिया, यूनिसेफ) के #YoungWarrior आंदोलन और YuWaah के नेशनल यंग पीपुल्स का एक हिस्सा हैं. एक्शन टीम (NYPAT), जिसे COVID-19 महामारी की दूसरी लहर के बीच मई 2021 में लॉन्च किया गया था. इससे उन्हें 15 वालंटियर्स की एक टीम बनाने में मदद मिली, जो कॉल करने और ऑक्सीजन के वेंडर्स के पास जाने के लिए तैयार थे.

उन्होंने कहा, हमने अपने ग्रुप का नाम ‘कोविड जूनागढ़’ रखा है. हमने सोर्स को वेरीफाई किया और लोगों को ज्यादा से ज्यादा अपडेट और सही जानकारी दी. हमने वेरिफाइड जानकारी फैलाने के लिए विभिन्न ग्रुप के माध्यम से व्हाट्सएप पर अधिक लोगों को जोड़ा. सोशल मीडिया के माध्यम से हमें जितने भी सवाल मिल रहे थे, हम उन्हें अपने ग्रुप पर आईटी पोस्ट कर रहे थे और वेरिफाइड जानकारी के साथ जवाब दे रहे थे.

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तीन दिनों के अंदर, ग्रुप पर भारी संख्या में सवाल आने लगे, जिसने दीपेन को Linktree पर एक वेब लिंक बनाने के लिए प्रेरित किया, एक ऐसा एप्लिकेशन जो कई लिंक को होस्ट करने के लिए एक लैंडिंग पेज बनाता है. ऐप ने ग्रुप को संगठित तरीके से अलग-अलग टैब के तहत अस्पताल के बेड, आईसीयू (इंटेंसिव केयर यूनिट) बेड, ऑक्सीजन, जरूरी दवाएं और बाकी जानकारी प्रदान करने में मदद की. रियल टाइम डेटाबेस को प्रस्तुत करने के लिए वे ज्यादा से ज्यादा यूजर्स फ्रेंडली तरीके को अपना रहे थे, उन्होंने एक वेबसाइट डेवलपर की मदद से ‘कोविड हेल्प, जूनागढ़’ नामक एक वेबसाइट बनाया, जिसने अपनी सेवाएं मुफ्त में देने की पेशकश की. एक हफ्ते के भीतर, वेबसाइट ने 70,000 से ज्यादा विज़िटर्स पार कर लिए.

मुझे याद है, जयपुर का एक जोड़ा, जो जूनागढ़ में परिवार के किसी सदस्य से मिलने जा रहा था, लॉकडाउन के कारण यहां फंस गया था और फिर उन्हें गंभीर कोविड संक्रमण हो गया था. हमने कुछ ही समय में उनके लिए प्लाज्मा की व्यवस्था की, वे ठीक हो गए और वापस चले गए. एक युवती को देर रात 2 बजे तत्काल ऑक्सीजन की जरूरत थी. यह परिवार के लिए एक चुनौतीपूर्ण समय था, लेकिन हमारे वालंटियर्स के नेटवर्क ने इसे तुरंत व्यवस्थित किया. ये हमारे लिए बहुत ही मार्मिक क्षण थे. ठीक हुए कुछ मरीजों ने हमें बताया कि उनके डॉक्टरों ने कहा कि समय पर मदद मिलने से उनकी जान बचाने में मदद मिली. इस तरह के अनुभवों ने हमारा मनोबल बढ़ाया और हमें प्रेरित किया.

लेकिन दीपेन और उनके वालंटियर्स के ग्रुप के लिए राह आसान नहीं थी, उन्हें कोविड के खिलाफ अपनी लड़ाई में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा.

दूसरी लहर के दौरान, मुझे लगता है कि हर व्यक्ति तनाव में था, खासकर के वे जो सीधे कोविड से प्रभावित थे- मरीज, उनके परिवार, डॉक्टर, अस्पताल के कर्मचारी, केमिस्ट, जरूरी चिकित्सा वस्तुओं के सप्लायर्स. हममें से अधिकांश लोग भी किसी न किसी रूप में इस महामारी से प्रभावित थे. लेकिन, हमारा काम जरूरी चिकित्सा संसाधनों की स्थिति जानने के लिए कॉल करना और स्रोतों का दौरा करना और दिन में कम से कम 4-5 बार डेटाबेस को अपडेट करना था क्योंकि उस समय, केसलोड बहुत ज्यादा थे और बेड, ऑक्सीजन और अन्य चीजों की उपलब्धता की स्थिति तेजी से बदल रही थीं और जानकारी कुछ ही घंटों में पुरानी हो रही थी. इसलिए, सबसे बड़ी समस्या जिसका हमें शुरू में सामना करना पड़ा, वह थी महत्वपूर्ण संसाधनों के आपूर्तिकर्ताओं को विश्वास में लेना. वे हमारे साथ बहुत बदतमीजी करते थे, जो समझ में आता है कि इस विनाशकारी दूसरी लहर के दौरान वे किस तरह के दबाव में थे. लेकिन हमारे जुनून का हम पर हमारे अहंकार से ज्यादा प्रभाव था. इसलिए, हमने सभी खराब कॉलों को बहुत धैर्यपूर्वक निपटाया. जल्द ही हमारे ग्रूप को हमारे छोटे शहर में पहचान मिलने लगी और चीजें हमारे लिए आसान होने लगीं. हमने सूचना फैलाने में मदद करने लिए अपने स्थानीय विधायकों से भी संपर्क किया. फाइनेंस के मामले में, हमें किसी चुनौती का सामना नहीं करना पड़ा, क्योंकि हमें केवल एक फोन, लैपटॉप और इंटरनेट कनेक्शन की जरूरत होती थी.

एक युवा अभियान का नेतृत्व करने के साथ-साथ, दीपेन ने कई एनजीओ और कॉरपोरेट्स के भोजन और इम्यूनिटी बूस्टर किट के वितरण अभियान में भी मदद कि जो उन गरीबों और जरूरतमंदों के लिए थी, जो होम आइसोलेशन में थे.

अब दीपेन और उनका ग्रुप अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक्सपर्ट्स के साथ ऑनलाइन चर्चा आयोजित करके कोविड और टीकाकरण के बारे में जागरूकता फैला रहे है. दीपेन ने यह कहते हुए बात खत्म की-,

महामारी और गलत सूचना, इन दो दुश्मनों को हराने का एकमात्र तरीका-आक्रामक रूप से फाइट बैक करना है. दूसरी लहर के दौरान मिली सीख, अनुभव और संपर्कों के साथ, हम उन चुनौतियों के लिए तैयार हैं जो भविष्य में आने वाली लहर हमें जूनागढ़ में स्रोतों की पुष्टि करने और रियल टाइम जानकारी प्रदान करने के संबंध में आ सकती हैं.

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