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कुपोषण

क्या फूड फोर्टिफिकेशन माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी को दूर करने का एक प्रभावी तरीका है? जानें फायदे और नुकसान

National Nutrition Month 2020 India: खाद्य सुदृढ़ीकरण (फूड फोर्टिफिकेशन) मेन फूड्स में जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्वों को शामिल करना और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को दूर करने का एक प्रभावी तरीका है लेकिन इस रणनीति की कुछ सीमाएं हैं.

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क्या फूड फोर्टिफिकेशन माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी को दूर करने का एक प्रभावी तरीका है? जानें फायदे और नुकसान

नई दिल्ली: यूनिसेफ की द स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स चिल्ड्रन 2019 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में पांच साल से कम उम्र के 69 प्रतिशत बच्चों की मृत्यु के पीछे कुपोषण पहला कारण है. रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि भारत में पांच साल से कम उम्र का हर दूसरा बच्चा किसी न किसी रूप में कुपोषण से प्रभावित होता है. मिनी वर्गीज, कंट्री डायरेक्टर, न्यूट्रीशन इंटरनेशनल के अनुसार, कुपोषण से पैदा होने वाली समस्याएं मस्तिष्क के विकास, शरीर की वृद्धि, इम्यून सिस्टम को प्रभावी ढंग से काम करने से रोक सकती हैं और बीमारी और विकलांगता के आजीवन जोखिम को बढ़ा सकती हैं.

सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी का नियंत्रण भूख और कुपोषण से लड़ने के समग्र प्रयास का एक जरूरी हिस्सा है. भारत एनीमिया और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को दूर करने के लिए कई तरह की रणनीतियों को लागू कर रहा है जिसमें आयरन-फोलिक एसिड पूरकता, विटामिन ए पूरकता, डायटरी डायवर्सिटी को प्रोत्साहित करने के लिए न्यूट्रिशनल हेल्थ एजुकेशन और अन्य शामिल हैं. हालांकि, एनीमिया का लेवल उच्च बना हुआ है. इसलिए, वर्ल्ड फूड प्रोग्राम के कंट्री डायरेक्टर बिशो परजुली ने बताया कि इसके लिए फूड फोर्टिफिकेशन जैसी रणनीतियों की शुरूआत की जरूरत है जो दुनिया के अन्य हिस्सों में साक्ष्य आधारित, आजमाई और परखी गई हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन फूड फोर्टिफिकेशन को भोजन में एक आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व (विटामिन और खनिज) की सामग्री को जानबूझकर बढ़ाने के अभ्यास के रूप में परिभाषित करता है ताकि फूड सप्लाई की पोषण गुणवत्ता में सुधार हो और स्वास्थ्य के लिए न्यूनतम जोखिम के साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य लाभ प्रदान किया जा सके.

उदाहरण के लिए खाने योग्य नमक में आयोडीन और आयरन मिलाना. इसी तरह दूसरे महत्वपूर्ण सूक्ष्म पोषक तत्वों को चावल, गेहूं का आटा, तेल और दूध जैसे स्टेपल में शामिल किया जा सकता है.

लेकिन क्या फूड फोर्टिफिकेशन किसी की डाइट में सूक्ष्म पोषक तत्वों को शामिल करने और कुपोषण की समस्या का समाधान करने का एक अच्छा तरीका है? विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह सिक्के के दो पहलू होते हैं, उसी तरह हर रणनीति के भी दो पहलू होते हैं. इस रिपोर्ट में हम आपके लिए फोर्टिफाइड फूड के फायदे और नुकसान दोनों लेकर आए हैं.

फूड फोर्टिफिकेशन के फायदे | Benefits Of Food Fortification

व्यवहार परिवर्तन की जरूरत नहीं है

फोर्टीफिकेशन कंज्यूमर्स की डाइट संबंधी आदतों में कोई बदलाव किए बिना बार-बार खाए जाने वाले फूड्स या डेली स्टेपल को अधिक पौष्टिक बना सकता है. गेहूं का आटा, चावल, दूध, तेल और नमक जैसे स्टेपल की मांग और खपत आम तौर पर हर परिदृश्य में निर्बाध बनी रहती है और कम से लेकर हाई इनकम ग्रुप तक की आबादी में इनका सेवन किया जाता है.

भोजन की विशेषताओं में बिना किसी बदलाव के पोषण प्रदान करता है

हालांकि सूक्ष्म पोषक तत्वों को शामिल किया जाता है. फोर्टिफिकेशन से भोजन के स्वाद, सुगंध, बनावट या रूप में कोई बदलाव नहीं होता है. उदाहरण के लिए चावल की मजबूती के लिए आवश्यक पोषक तत्वों के साथ चावल के आटे को मिलाकर फोर्टिफाइड चावल कर्नेल (FRK) का निर्माण किया जाता है.

पोषक तत्वों के शारीरिक भंडार बनाए रखें

डब्ल्यूएचओ और संयुक्त राष्ट्र के फूड और एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन द्वारा जारी ‘सूक्ष्म पोषक तत्वों के साथ फूड फोर्टिफिकेशन पर दिशानिर्देश के अनुसार अगर नियमित और लगातार आधार पर सेवन किया जाता है, तो फोर्टिफाइड फूड्स पोषक तत्वों के शरीर के भंडार को आंतरायिक की तुलना में अधिक कुशलता से और अधिक प्रभावी ढंग से बनाए रखेंगे.

फोर्टिफाइड फूड्स कई कमियों के जोखिम को कम करने में भी बेहतर होते हैं जो फूड सप्लाई में मौसमी कमी या खराब गुणवत्ता वाली डाइट के परिणामस्वरूप हो सकते हैं. ये बच्चों की वृद्धि और विकास के लिए के साथ फर्टिलाइज उम्र की महिलाओं के लिए भी जरूरी होते हैं, जिनकी पर्याप्त पोषक तत्वों के साथ गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान जरूरत होती है. फोर्टीफिकेशन स्तन के दूध में विटामिन की मात्रा बढ़ाने और इस प्रकार प्रसवोत्तर महिलाओं और शिशुओं में सप्लीमेंटेशन की जरूरत को कम करने का एक बेहतरीन तरीका हो सकता है.

लागत प्रभावी हस्तक्षेप

फूड फोर्टिफिकेशन की कुल लागत बेहद कम है; प्राइस इंक्रीज टोटल फूड प्राइज का लगभग 1 से 2 प्रतिशत है.

न्यूट्रीशन इंटरनेशनल और टोरंटो विश्वविद्यालय ने इनकैप्सुलेटेड फेरस फ्यूमरेट-डबल फोर्टिफाइड साल्ट (EFF-DFS) विकसित किया है जिसमें आयरन और आयोडीन दोनों होते हैं.

सूक्ष्म पोषक तत्वों के प्राकृतिक या निकट प्राकृतिक लेवल होते हैं

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, फोर्टीफिकेशन का उद्देश्य आमतौर पर सूक्ष्म पोषक तत्वों की आपूर्ति करना होता है, जो कि एक अच्छी, बैलेंस डाइट द्वारा प्रदान किए जाने वाले अनुमानित मात्रा में होता है. नतीजतन फोर्टिफाइड स्टेपल फूड्स में सूक्ष्म पोषक तत्वों के प्राकृतिक या निकट प्राकृतिक स्तर होंगे, जो जरूरी नहीं कि सप्लीमेंट डाइट के मामले में हो.

फूड फोर्टिफिकेशन के नुकसान | Disadvantages Of Food Fortification

अच्छे पोषण का विकल्प नहीं

जबकि फोर्टिफाइड फूड्स में चयनित सूक्ष्म पोषक तत्वों की बढ़ी हुई मात्रा होती है, वे एक अच्छी गुणवत्ता वाले आहार का विकल्प नहीं होते हैं जो पर्याप्त मात्रा में ऊर्जा, प्रोटीन, हेल्दी फैट और अन्य फूड कॉम्पोनेंट्स की आपूर्ति करता है जो बेहतर स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैं.

शिशुओं और बच्चों को लाभ नहीं हो सकता

जीवन के पहले छह महीनों के लिए खासकर स्तनपान कराने की सलाह दी जाती है. एक बच्चे को पोषण तभी मिलेगा जब स्तनपान कराने वाली मां स्वस्थ होगी और पर्याप्त पोषण का सेवन करेगी. छह महीने के बाद सप्लीमेंट डाइट शुरू की जाती है, जिसमें शिशु और बच्चे अपेक्षाकृत कम मात्रा में भोजन करते हैं.

उनके सभी सूक्ष्म पोषक तत्वों की अनुशंसित मात्रा को यूनिवर्सल रूप से स्ट्रॉन्ग स्टेपल से पाने की संभावना कम है. डब्ल्यूएचओ द्वारा अनुशंसित इन आयु समूहों के लिए फोर्टिफाइड पूरक फूड्स उपयुक्त हो सकते हैं.

जनसंख्या के सबसे गरीब वर्ग तक पहुंच में विफल

कम क्रय शक्ति और एक अविकसित डिस्ट्रिब्यूशन चैनल के कारण सामान्य आबादी के सबसे गरीब वर्गों ने खुले बाजारों में फोर्टिफाइड फूड्स तक पहुंच को रिस्ट्रिक्ट कर दिया है.

लॉन्ग टर्म सॉल्यूशन नहीं है

ग्लोबल न्यूट्रिशन लीडरशिप अवार्ड से सम्मानित बसंत कुमार कर का मानना है कि फूड फोर्टिफिकेशन एक शॉर्ट एंड मीडियम टर्म का उपाय है. लॉन्ग टर्म स्टेबिलिटी के लिए सूक्ष्म पोषक तत्व कुपोषण को दूर करने के लिए डायटरी डायवर्सिटी महत्वपूर्ण है.

अपने दिशानिर्देशों में, FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) ने भी कुपोषण को दूर करने के लिए ‘बैलेंस, डाइट रिप्लेसमेंट’ के बजाय ‘कम्प्लीमेंटरी स्ट्रेटजी’ के रूप में फूड फोर्टिफिकेशन का सुझाव दिया है.

हानिकारक प्रभाव हो सकता है

किसी भी चीज की अति बुरी होती है. जनसंख्या की प्रभावशीलता और सूक्ष्म पोषक स्थिति का विश्लेषण करने के बाद पब्लिक हेल्थ मेजर्स के बाद बढ़ावा दिया जाना चाहिए. कुछ मामलों में विटामिन और खनिजों की अधिक मात्रा हानिकारक प्रभाव डाल सकती है.

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