Connect with us

ताज़ातरीन ख़बरें

राय: एमरजेंसी में मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता प्रबंधन को प्राथमिकता

विशेषज्ञों के अनुसार, स्कूलों के बंद होने के साथ, कई लड़कियां मासिक धर्म स्वच्छता उत्पादों का उपयोग करने के लिए निर्भर हो जाती हैं, लड़कियों में यह क्षमता आ जाती है कि वो किस तरह से मासिक धर्म के समय खुद को स्वच्छ और स्वस्थ रखें, बिना किसी को पता चले

राय: एमरजेंसी में मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता प्रबंधन को प्राथमिकता

पिछले कुछ सालों में, जैसा कि दुनिया ने एसडीजी यानी कि सतत विकास लक्ष्यों में, विशेष रूप से लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण पर एसडीजी 5 को पाने के लिए त्वरित कार्रवाई देखी, जिसका सीधा संबंध महिलाओं में जुड़ी समस्याओं और स्वास्थ्य से है. लड़कियां शिक्षा और अपने जीवन में किस तरह से मासिक धर्म की समस्या को मैनेज करती हैं. वहीं भारत में, मासिक धर्म को लेकर जागरूकता बढ़ाए जाने के साथ-साथ इसके लिए कई दिशा निर्देश तो हैं, ही साथ ही इसके संबंध में कई तरह की योजनाओं को भी चलाया गया है, ताकि मासिक धर्म से जूड़े उत्पादों के प्रति लोग जागरूक हो सकें. इतना ही नहीं महिलाओं के स्वस्थ्य, स्वच्छता और मासिक धर्म के अपशिष्ट के निपटारे को लेकर भी इस दिशा में काम किया जा रहा है.

इसे भी पढ़ें : विचार: क्‍या फूड फोर्टिफिकेशन के जरिए छिपी हुई भूख, सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी से लड़ा जा सकता है?

मासिक धर्म के प्रति जागरूकता फैलाने की दिशा में प्रगति हो रही है, लेकिन कई बार ऐसा होता है कि मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता प्रबंधन (MHHM) का काम रुक जाता है और ऐसा किसी आपातकालीन संदर्भ में होता है. आज, कई राज्य ऐसे हैं, जिन्हें दोहरी आपदाओं के बीच मासिक धर्म जैसी स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरतों को संबोधित करने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, चक्रवात, बाढ़ या फिर कोविड-19 महामारी के पैमाने पर यह काफी ज़्यादा प्रभावित हुई है.

अन्य आपात स्थितियों की तरह, कोविड-19 का भी एक अलग प्रभाव पड़ा है, जिसका भूगतान कहीं न कहीं महिलाओं, लड़कियों को यौन-लिंग के आधार पर करना पड़ा है. वहीं मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता एक ऐसा अंश हैं जो इन बातों से दृढ़ता से नाकाब हटाता है.

मासिक धर्म किसी आपात स्थिति को देखकर नहीं रूकता है, यह प्रकृतिक है. कोविड-19 की पहली लहर के दौरान मासिक धर्म से जुड़े सैनेटरी पैड की ज़रूरतों का अंदाजा तब लगना शुरू हुआ, जब कई संगठनों और मीडिया ने इसके बेहद ज़रूरी होने की बात पर प्रकाश डाला. दरअसल, कोविड में लगे लॉकडाउन में जब हर तरह की गतिविधि, परिवहन की आवाजाही पर रोक लग गई थी उस दौरान सैनेटरी पैड के उत्पादन में खासी कटौती हुई, लेकिन इस दौरान भी महिलाओं को इसकी ज़रूरत उतनी ही थी जितनी आम दिनों में होती है. इनमें से कुछ समस्याओं का समाधान इस साल सैनेटरी पैड की उपयोगिता को देखते हुए किया जा चुका है. फिर भी कई महिलाओं और लड़कियों के लिए सुरक्षित मासिक धर्म प्रोडक्‍ट, स्वास्थ्य की सुरक्षा और स्वच्छ सुविधाओं के लिए MHHM से सही जानकारी जुटाना एक चुनौती की तरह है.

स्कूलों के बंद होने के साथ ही, जिस पर कई लड़कियां मासिक धर्म से जुड़े स्वच्छता उत्पादों का उपयोग करने के लिए निर्भर रहती हैं, बावजूद इसके लड़कियां सुरक्षा और गरिमा के साथ MHHM को मैनेज करने की क्षमता रखती हैं. वहीं कई गरीब परिवार जो गंभीर आर्थिक तनाव से जूझ रहे होते हैं उनके सामने समस्या होती है कि वो खाने पर पैसा खर्च करें, घर के किराए पर या फिर सैनेटरी पैड को खरीदने में. आर्थिक समस्याओं को देखकर कहा जा सकता है कि चुनौतियां केवल मासिक धर्म से जुड़े सही व स्वच्छ उत्पादों तक ही सीमित नहीं है.

कम आय वाले परिवारों की महिलाओं और लड़कियों को भी कई परिस्थितियों में मासिक धर्म से जुड़े उत्पादों को खरीदने से पहले उनके बारे में सोचना पड़ता है इतना ही नहीं इन उत्पादों को यदि वो खरीद भी लें तो वो इस बात से डरती हैं कि छोटे से घर में उनके इन उत्पादों पर किसी सदस्य की नज़र न पड़ जाए. वहीं ऐसी महिलाएं जो दिव्यांग हैं, और जिनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है, ऐसी स्थिति में भी महिलाओं को मासिक धर्म में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.

इसलिए एमएचएचएम को आपात स्थिति के जवाब प्राथमिकता को दिया जाना चाहिए, ताकि महिलाओं और लड़कियों की निजता और गरिमा सुनिश्चित की जा सके. आपदाओं के दौरान भी गरिमा के साथ रहना एक मौलिक मानवीय अधिकार है. साल 2020 में, यूएनएफपीए और वॉटरएड ने देश भर में एमएचएचएम और आपदा प्रतिक्रिया के क्षेत्र में विशेषज्ञों और चिकित्सकों के साथ परामर्श करके भारत में आपात स्थिति के दौरान एमएचएचएम पर कार्रवाई के लिए एक रूपरेखा विकसित की थी.

इसे भी पढ़ें : दुनिया लैंगिक असमानता और महिलाओं के खिलाफ हिंसा के शेडो पेंडेमिक से जूझ रही है: सुसान फर्ग्यूसन, भारत की संयुक्त राष्ट्र महिला प्रतिनिधि

इस ढांचे में आपात प्रतिक्रिया के जरिए एमएचएचएम के एकीकरण का आह्वान किया गया है- आपदा की तैयारी, आपदा प्रतिक्रिया, और रिकवरी. इस ढांचे में यौन और प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षा सेवाओं सहित आवश्यक स्वास्थ्य में एमएचएचएम को एकीकृत करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला गया है.

आपात स्थिति में एमएचएचएम का एक व्यापक दृष्टिकोण:

1. आवश्यक मासिक धर्म उत्पादों का प्रावधान;
2. बाधाओं को दूर करते हुए सूचना का प्रसार;
3. सुलभ, सुरक्षित और उपयोग करने योग्य शौचालयों, धुलाई/स्नान वाले क्षेत्रों और अपशिष्ट निपटाने के समाधानों के साथ अन्य सुविधाओं/राहत आश्रयों को स्वच्छता से मासिक धर्म प्रबंधन के लिए तैयार करना.

उत्पादों का वितरण करना मासिक धर्म में राहत प्रयासों का मुख्य आधार है. इसके लिए एक मासिक धर्म किट बनाई जा सकती है जिसमें सैनेटरी पैड, अंडरवियर, साबुन, तौलिया, कागज के इस्तेमाल, पैड का निपटारा करने और उपयोग की जानकारी होगी; इसके अलावा राहत केंद्रों में पैड बैंक या पैड एटीएम की स्थापना; या फिर मासिक धर्म उत्पादों की खरीद की सुविधा के लिए नकदी के आदान-प्रदान की सुविधा होनी चाहिए. कुछ परिस्थितियों में कहा जाता है कि कपड़े या फिर सूती कपड़े का इस्तेमाल बतौर पैड किया जाना चाहिए, क्योंकि पुनः इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. लेकिन राहत के लिए सही उत्पादों का वितरण किया जाना ज़रूरी है जिससे मासिक धर्म की स्थिति में उपयोगकर्ता को राहत मिल सके. मासिक धर्म से जुड़े ये उत्पाद सही उपयोग पैटर्न और वरीयताओं को ध्यान में रखकर बनाने चाहिए. सैनेटरी पैड के साथ अंडरवियर जैसी सहायक सामग्रियों की आवश्यकता होती है, और इन उत्पादों को ज़रूरत के आधार पर परख लेना चाहिए.

नागरिक समाज संगठनों (सीएसओ) द्वारा राहत प्रयासों से संकेत मिला है कि आपदाओं के दौरान महिलाओं और लड़कियों की जरूरतों को पूरा करने में एमएचएचएम के बारे में सूचना प्रसार के साथ उत्पाद वितरण सबसे प्रभावी है. लड़कियों और महिलाओं को यह जानने की जरूरत है कि सीमित संसाधनों के साथ उत्पादों का सुरक्षित रूप से उपयोग, रखरखाव और उनता निपटारा कैसे किया जाए. कई बुज़ुर्ग महिलाएं, सैनेटरी पैड से ज़्यादातर अपरिचित ही रहती हैं, तो वहीं लड़कियां पैड की सीमित संख्या की वजह से एक ही पैड को लंबे समय तक लगाकर रखती हैं.

आपात स्थिति के दौरान महिलाओं को होने वाली परेशानी एमएचएचएम के लिए एक चुनौती है. एमएचएचएम मासिक धर्म से संबंधित भेदभावपूर्ण मानदंडों को देखते हुए अपने कार्यों को और तेज कर सकता है. आपात स्थिति में मासिक धर्म से जुड़े ऐसे भेदभावपूर्ण मानदंडों से निपटने के लिए सटीक और वैज्ञानिक जानकारी का प्रसार करना एक महत्वपूर्ण कदम है. मासिक धर्म को गलत ठहराने वाले या कलंकित करने वाले मानदंड महिलाओं और लड़कियों के साथ-साथ ट्रांसजेंडर पुरुषों और लिंग-विविध व्यक्तियों के सम्मान और आत्मसम्मान को खराब या बाधित कर सकते हैं. 2020 में जल आपूर्ति और स्वच्छता सहयोगी परिषद (WSSCC) और युवा की अवाज (YKA) द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, 80 प्रतिशत महिलाओं ने अपने पहले मासिक धर्म की अवधि के दौरान नकारात्मक भावना का अनुभव करने की जानकारी दी थी. विकास और आपातकालीन स्थिति में कई सालों से चली आ रही मासिक धर्म से संबंधित अफवाहें और बाधाओं के कारण आज मासिक धर्म स्वास्थ्य प्रबंधन प्रभावित हो चुका है.

स्वच्छता आपात स्थिति में लिंग के प्रति संवेदनशीलता एमएचएचएम का एक और अनिवार्य पहलू है. कई आपदा वाली स्थिति में, लिंग के आधार को केंद्र से हटाकर अस्थायी या मोबाइल शौचालय और स्नान सुविधाओं की स्थापना की जाती है, हालांकि मासिक धर्म कचरा निस्तारण एक चुनौती बना हुआ है. कुछ सरल, अस्थायी समाधानों में मासिक धर्म अपशिष्ट एकत्र करने के लिए शौचालय स्टॉलों में या उसके पास ढक्कन के साथ कंटेनर प्रदान करना करना और महिलाओं के शौचालय सुविधा के पास निपटान गड्ढों की खुदाई करना एक बेहतर कदम होगा.

वहीं पैड के उचित निपटान में मदद करने के लिए मासिक धर्म अपशिष्ट के लिए चिह्नित किया जाना चाहिए. लम्बे समय तक इस्तेमाल किए जाने वाली सुविधा ऐसी स्थिति में राहत दे सकती है, और ये एक सही समाधान भी होगा पैड अपशिष्ट निपटारे का. वहीं ऐसे राहत केंद्र बनाए जाने चाहिए जिसमें मसिक धर्म से जुड़ी हर सुविधा मौजूद हो. गुणवत्ता वाला बर्निंग चैंबर्स, एक गहरा गड्ढा, इनकी सहायता से चुटकियों में पैड का निपटारा हो सकता है. और इससे गंदगी भी नहीं होगी. लेकिन पैड अपशिष्ट के निपटारे के लिए केंद्रीय स्तर पर कुछ प्रासंगिक समाधानों की आवश्यकता है. उदाहरण के लिए, अपशिष्ट को जला देने का समाधान सुनने में भले ही ठीक-ठाक लगता हो लेकिन ये उन समुदायों को आहत कर सकता है जिनके पास ठोस मान्यताएं हैं मासिक धर्म अपशिष्ट को न जलाने की.

एमएचएचएम उत्पाद वितरण, सूचना प्रसार और आपात स्थिति के दौरान स्वच्छ स्वच्छता सुनिश्चित करने के प्रयास केवल लड़कियों और महिलाओं की जरूरतों को समझने और उन्हें पूरा करने के लिए संवेदनशील और प्रशिक्षित फ्रंटलाइन लोगों के साथ सफल हो सकते हैं.

एमएचएचएम की जरूरतों समेत यह विशेष रूप से महिलाओं के यौन और प्रजनन स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी है. महिलाओं और एमएचएचएम को आज ऐसे लोगों की ज़रूरत है जो महिलाओं की जरूरतों पर लोगों को जागरुक कर सकें. एमएचएचएम सहित लड़कियों और महिलाओं की जरूरतों पर संक्षिप्त सत्रों का होना ज़रूरी है, ये काफी हद तक लोगों को जागरुक करने में मदद कर सकता है, और आपात प्रतिक्रिया में एमएचएचएम को एकीकृत करने के प्रयासों को मजबूत कर सकता है.

केरल, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार और पूर्वोत्तर भारत जैसे राज्यों से आपात प्रतिक्रिया में एमएचएचएम को एकीकृत करने के बारे में बहुत कुछ सीखा जा सकता है, जो अक्सर प्राकृतिक आपदाओं का सामना करते हैं. इनमें से कुछ राज्यों ने यह प्रदर्शित किया है कि आपदा तैयारियों में एमएचएचएम का एकीकरण सरल तरीकों से कैसे किया जा सकता है: स्कूलों और समुदायों में दिए गए नियमित रूप से एमएचएचएम के जरिए मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता के बारे में बुनियादी जानकारी प्रदान कर सकते हैं, और लड़कियों और महिलाओं को आपदाओं के दौरान सुरक्षित रूप से अपने मासिक धर्म को मैनेज कैसे किया जाए इससे जागरुक कर सकते हैं. लड़कियां अपनी खुद की मासिक धर्म से जुड़ी जानकारी, अंडरक्लोथ्स, साबुन और अन्य आवश्यक बातों के साथ अपनी आपातकालीन स्वच्छता किट बनाने के बारे में जानकारी दे सकती है. स्कूल, आंगनबाड़ियों और स्वास्थ्य केंद्र मासिक धर्म के उत्पादों के लिए खुद की डिपो तैयार कर सकते हैं, जिन्हें आपदाओं के दौरान लड़कियां और महिलाएं एक्सेस कर सकती हैं. ऐसे उपायों से महिलाओं को रिकवरी फेज में भी मदद मिलती है.

कुछ राज्य ऐसे हैं जो पहले से ही आपदाओं के लिए तैयार रहते हैं. वह ज़रूरी सामान, उपकरणों, नीतियों के साथ आपदा को असफल करने के लिए अग्रसर रहते हैं, उन्हें आपदा के प्रभावों का भान पहले ही हो जाता है. कुछ ग्राम पंचायतों में किशोर और महिलाए सामुदायिक चर्चाओं, योजना और शमन प्रयासों में लगे हुए हैं, जिसके परिणामस्वरूप समुदाय में लड़कियों और महिलाओं को आवश्यक जानकारी प्रदान की जा रही है, सभी के लिए मासिक धर्म उत्पादों की व्यवस्था की जानकारी दी जा रही है, आपदा के दौरान सुरक्षित स्वच्छता सुविधाओं की उपलब्धता और ज़रूरी सामानों की पहुंच लोगों तक होना सुनिश्चित करना है, और समग्र अपशिष्ट प्रबंधन के एक भाग के रूप में मासिक धर्म अपशिष्ट के लिए निपटान करना ही एक विकल्प हैं.

इसे भी पढ़ें : विचार: परिवार नियोजन तथा यौन और प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं में पोषण कार्यक्रम को शामिल करें

आखिरकाल, आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रयासों में एमएचएचएम को एकीकृत करने के लिए उचित बजट आवंटन सुनिश्चित करना जरूरी है. बजट को मासिक धर्म उत्पाद वितरण और एमएचएचएम की जरूरतों को पूरा करने वाली सुविधाओं के लिए विभाजित किए जाने की आवश्यकता है. उदाहरण के लिए, यदि मोबाइल शौचालय स्थापित किए जा रहे हैं, तो बजट में पुरुषों और महिलाओं के लिए पर्याप्त संख्या में अलग-अलग शौचालयों को समायोजित किया जाना चाहिए. आपातकाल की अवधि में फंड और संसाधनों को जुटाने के लिए विचार करना चाहिए, चाहें यह आपूर्ति नियमित रूप से आवश्यक हो, और लड़कियों और महिलाओं की संख्या के हिसाब से इसे तैयार करना चाहिए.

मासिक धर्म स्वच्छता की आपूर्ति, खाद्य राशन के समान, नियमित रूप से आवश्यक होते हैं, न कि केवल तत्काल राहत प्रयासों के दौरान. इन सभी सामानों के लिए सामान्य स्थिति बहाल होने तक का बजट तैयार करना चाहिए.

यह सुनिश्चित करना कि महिलाएं, लड़कियां, ट्रांसजेंडर पुरुष और लिंग-विविध व्यक्ति आपात स्थिति के दौरान गरिमा के साथ मासिक धर्म का प्रबंधन करने में सक्षम हैं या नहीं ये पूरी तरह से मानवाधिकारों का मामला है. इस मासिक धर्म स्वच्छता दिवस पर हम चाहते हैं कि आप आपात स्थिति में बुनियादी अधिकार के रूप में एमएचएचएम को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध होने के लिए हमारे साथ शामिल हों.

(लेख: सह लेखक- अर्जेंटीना माटावेल पिकिन (Matavel Piccin), यूएनएफपीए प्रतिनिधि भारत और देश के निदेशक भूटान और वीके माधवन, मुख्य कार्यकारी, वॉटर ऐड (WaterAid) भारत)

Disclaimer: इस लेख के भीतर व्यक्त की गई राय लेखक की व्यक्तिगत राय है. लेख में दिखने वाले तथ्य और राय एनडीटीवी के विचारों को नहीं दर्शाते और एनडीटीवी इसके लिए कोई जिम्मेदारी या दायित्व नहीं मानता.

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Leaving No One Behind

Mental Health

Environment

Join Us