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मासिक धर्म स्वास्थ्य को बढ़ावा देकर, युवाओं को बेहतर भविष्य के लिए सशक्त बना रहा प्रोजेक्ट गरिमा

प्रोजेक्ट गरिमा दिल्ली की 17 वर्षीय लड़की अहाना भरत राम की देन है, जिसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि की लड़कियों और महिलाओं के बीच किफायती सैनिटरी पैड बांटे जाते हैं

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मासिक धर्म स्वास्थ्य को बढ़ावा देकर, युवाओं को बेहतर भविष्य के लिए सशक्त बना रहा प्रोजेक्ट गरिमा
परियोजना के तहत, राम सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली लड़कियों और दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करने वाली महिलाओं को मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता के बारे में शिक्षित करती हैं

नई दिल्ली: मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता को बढ़ावा देना लड़कियों और महिलाओं के समग्र कल्याण के लिए एक महत्वपूर्ण साधन है, और यह संदेश दिल्ली की 17 वर्षीय लड़की अहाना भरत राम की तरफ से प्रभावी तरीके से दोहराया जा रहा है. गुड़गांव के मौलसारी में स्थित श्री राम स्कूल की छात्रा, भरत राम ने 5 जून, 2023 को अपने घरेलू संगठन, ‘स्पॉट ऑन एंड ऑफ’ के तहत प्रोजेक्ट ‘गरिमा’ लॉन्च किया, जो मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता के बारे में जागरूकता फैलाने की दिशा में काम करता है, जिससे युवा लड़कियों और महिलाओं के लिए सुरक्षित मासिक धर्म को बढ़ावा मिल सके.

होम-रन संगठन, ‘स्पॉट ऑन एंड ऑफ’ की स्थापना के पीछे का उद्देश्य

राम ने 2020 में संगठन लॉन्च किया. उस प्रेरणा के बारे में बात करते हुए जिसने उन्हें इसे लॉन्च करने के लिए प्रेरित किया, राम ने कहा,

मैं एक स्कूल प्रोजेक्ट के लिए रिसर्च कर रही थी, जब मुझे ये चौंकाने वाले आंकड़े मिले कि भारत में सिर्फ 21 फीसदी महिलाएं सैनिटरी पैड पहनती हैं. इस दौरान मुझे यह भी पता चला कि सैनिटरी पैड की कमी के चलते देश की लाखों लड़कियां स्कूल तक छोड़ देती हैं. यह सब मेरे दिमाग से परे चला गया. मैं बिना पैड के अपने पीरियड से गुजरने के बारे में सोच भी नहीं सकती. ये कुछ ऐसा है जिसे मैं जानती हूं. तो, इसने मुझे चौंका दिया और मुझे उन महिलाओं के बारे में महसूस कराया कि जो बिना किसी स्वाच्छता और स्वस्थ्य समाधान के बिना अपना जीवन व्यतीत कर रही हैं.

जिसके बाद 17 वर्षीया अहाना अपनी मां राधिका भरत राम के पास पहुंची, जो सालों से परोपकारी कार्यों में शामिल रही हैं. जिसके बाद राधिका ने अहाना को स्पॉट ऑन एंड ऑफ स्थापित करने में मदद की और साथ में दिल्ली और गुरुग्राम के विभिन्न सरकारी स्कूलों में कई एमएचएम (मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन) कार्यशालाएं और सत्र आयोजित किए हैं. वर्तमान में स्पॉट ऑन एंड ऑफ दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं तक पहुंच गया है.

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प्रोजेक्ट गरिमा ग्रामीण लड़कियों और महिलाओं के बीच मासिक धर्म स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने की दिशा में इन प्रयासों का एक विस्तार है.

प्रोजेक्ट गरिमा

परियोजना के तहत, राम सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली लड़कियों और दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करने वाली महिलाओं को मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता के बारे में शिक्षित करती हैं. इसके अलावा वह राहत कार्य में शामिल व्यक्तियों और संगठनों को 50 रुपये में किफायती सैनिटरी पैड बेचती है, जिसे वे आगे उन लड़कियों और महिलाओं को वितरित करते हैं जिनके पास पैड खरीदने का कोई साधन नहीं है.

ये रियूजेबल सैनिटरी नैपकिन हैं, जो व्यक्तियों द्वारा दान किए गए कपड़े के बेकार टुकड़ों को सिलकर बनाए जाते हैं. इन्हें दिल्ली ब्लाइंड रिलीफ एसोसिएशन के सदस्यों द्वारा बनाया गया है, जिन्होंने एसोसिएशन की सिलाई इकाई में सिलाई का कौशल हासिल किया है. पैड की ब्रिकी से प्राप्त राशि का उपयोग सैनिटरी नैपकिन के अगले सेट को बनाने और ब्लाइंड रिलीफ एसोसिएशन के सदस्यों की आय के रूप में किया जाता है.

18 वर्षीय मीना उन छात्रों में से एक हैं, जिन्होंने ब्लाइंड रिलीफ एसोसिएशन में प्रोजेक्ट गरिमा के तहत बहु-कौशल पाठ्यक्रम प्रशिक्षण प्राप्त किया है. अपने अनुभव के बारे में बात करते हुए, मीना ने कहा,

शुरुआत में, जब मैंने पाठ्यक्रम शुरू किया, तो मैंने ये सोचा था कि मैं कभी भी यह कौशल सीख नहीं पाऊंगी. लेकिन एक महीना पूरा करने के बाद, मुझे एहसास हुआ कि मैंने कितने कौशल हासिल किए हैं, और इससे मुझे विश्वास हुआ कि मैं इसे सीख सकती हूं.

सीखने की खुशी ने बिहार के सीवान से यहां आई रीमा के लिए भी आत्मविश्वास के दरवाजे खोल दिए हैं. अपने अनुभव के बारे में बात करते हुए रीमा ने कहा,

मैं जीवन में बेहद हतोत्साहित थी और सोचता थी कि मैं कभी कुछ कर ही नहीं पाऊंगी. लेकिन प्रोजेक्ट गरिमा के तहत काम करने के बाद मुझे लगा कि मैं भी सीख सकती हूं, आजीविका चलाने के लिए कुछ कर सकती हूं और अपना जीवन जी सकती हूं.

अब तक यह संगठन 6,500 महिलाओं तक पहुंच चुका है. प्रोजेक्ट गरिमा ने अपनी हालिया शुरुआत के बाद से 200 से अधिक व्यक्तियों को कवर किया है. प्रोजेक्ट गरिमा के साथ, राम बेहतर स्वास्थ्य और कल्याण के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के संयुक्त राष्ट्र के सतत लक्ष्य 3 और 4 का समर्थन करती हैं. परियोजना के साथ अपनी भविष्य की योजनाओं के बारे में बात करते हुए, राम ने कहा,

मैं चाहती हूं कि ‘गरिमा’ उन सभी लड़कियों और महिलाओं तक पहुंचे जो लंबे समय से मासिक धर्म के बारे में उचित जानकारी और सैनिटरी पैड तक पहुंच से वंचित हैं.

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प्रोजेक्ट गरिमा के साथ, राम का लक्ष्य शिक्षा और पहुंच की दोहरी समस्याओं का समाधान करना है, जो अच्छे स्वास्थ्य और कल्याण के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के संयुक्त राष्ट्र के सतत लक्ष्य 3 और 4 का भी समर्थन करता है. वह न केवल मासिक धर्म स्वच्छता प्रथाओं के बारे में जागरूकता फैलाने और ज्ञान में सुधार करने का प्रयास कर रही हैं, बल्कि स्कूली लड़कियों के लिए मासिक धर्म के कलंक और शारीरिक दुष्परिणामों को खत्म करने के लिए भी काम कर रही हैं.

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