Connect with us

विज्ञान तथा स्वास्थ्य

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के प्रमुख आरएस शर्मा ने एकीकृत स्वास्थ्य इंटरफेस पर कहा, भविष्य में एक साथ कदम रखना जरूरी

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सीईओ आरएस शर्मा एनडीटीवी-डेटॉल बनेगा स्वस्थ भारत के 12 घंटे के लक्ष्य- संपूर्ण स्वास्थ्य का टेलीथॉन में शामिल हुए, जहां उन्होंने भारत में हेल्‍थ केयर सर्विस के डिजिटलीकरण के बारे में बात की

Read In English
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के प्रमुख आरएस शर्मा ने एकीकृत स्वास्थ्य इंटरफेस पर कहा, भविष्य में एक साथ कदम रखना जरूरी
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के तहत, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) ने 12 जनवरी, 2022 को यूनाइटेड हेल्थ इंटरफेस (UHI) लॉन्च करने की घोषणा की थी.

नई दिल्ली: ‘दुनिया की फार्मेसी’ के रूप में सम्मानित, भारत स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण पर विशेष ध्यान देने के साथ भविष्य में कदम रख रहा है. COVID-19 महामारी ने यह साफ कर दिया है कि एक व्यक्ति के स्वस्थ रहने के लिए, सभी को स्वस्थ रहने की आवश्यकता है. या तो हम सब स्वस्थ हैं या नहीं. यहां तक कि एक व्यक्ति की अस्वस्थता भी हम सभी को सेंसिटिव और जोखिम में डाल देती है. यदि हम प्रत्येक भारतीय के लिए समग्र अच्छे स्वास्थ्य के अपने लक्ष्य को पाना चाहते हैं, तो हम इसे तभी पा सकते हैं जब हम, व्यक्तियों, नागरिक समाज, कॉरपोरेट्स, एनजीओ, हेल्‍थ केयर एक्‍सपर्ट और सरकार एक साथ आते हैं. हेल्‍थ एक विशेषाधिकार नहीं हो सकता; यह हर भारतीय का अधिकार होना चाहिए. इस बारे में बात करने के लिए, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सीईओ आरएस शर्मा एनडीटीवी-डेटॉल बनेगा स्वस्थ भारत के 12 घंटे के लक्ष्य- संपूर्ण स्वास्थ्य का टेलीथॉन में शामिल हुए.

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के तहत, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) ने 12 जनवरी, 2022 को यूनिफाइड हेल्थ इंटरफेस (UHI) लॉन्च करने की घोषणा की थी. यूनिफाइड हेल्थ इंटरफेस (UHI) भारत में हेल्‍थ डिजिटल के लिए एक खुला और इंटरऑपरेबल IT नेटवर्क है. यूएचआई के बारे में जानकारी शेयर करते हुए शर्मा ने कहा,

इसे भी पढ़ें: अपने फूड को जानें: अपनी डाइट में बाजरे को शामिल करने के लिए क्या करें और क्या न करें?

इसका विचार मूल रूप से यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस से आया है. इसका मतलब है, हम एक यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस की तरह एक पूर्ण अंतःक्रियाशीलता चाहते हैं. आप किसी भी बैंक से, किसी भी बैंक में पैसे ट्रांसफर करने में सक्षम हैं; किसी भी बैंक से, किसी भी वॉलेट में; बैंक किसी भी व्यक्ति को टेलीफोन नंबर से पैसे ट्रांसफर कर सकता है. इसलिए, हम एक ऐसा ढांचा तैयार कर रहे हैं जहां कोई भी समान मानक एपीआई (एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस) का उपयोग करके डॉक्टरों, एम्बुलेंस, ब्लड बैंकों की खोज कर सकता है. अंत में, किसी को सेवाओं का लाभ उठाने में सक्षम होना चाहिए, जिसका अर्थ है कि आप टेली-कंसल्‍टेशन कर सकते हैं, वहां जा सकते हैं और टीकाकरण करवा सकते हैं, या ब्‍लड डोनेट कर सकते हैं.

यूनिफाइड हेल्थ इंटरफेस के बारे में विस्तार से बताते हुए, शर्मा ने कहा,

हम इंटरऑपरेबल टेलीकम्युनिकेशन, इंटरऑपरेबल कॉमर्स और दवाओं की खरीद की बात कर रहे हैं. हम इंटरऑपरेबल बुकिंग के बारे में बात कर रहे हैं हमें अस्पताल या एम्बुलेंस और जैसी चीजों पर बात कर रहे हैं. यह समग्र व्यापक ढांचा है, जो अनिवार्य रूप से इन एप्लिकेशन को डाउनलोड किए बिना सभी के लिए सेवाओं की उपलब्धता को बढ़ा देगा.

इसे भी पढ़ें: राय: जलवायु परिवर्तन और पोषण संबंधी चुनौतियों से लड़ने में मदद कर सकता है बाजरा

भारत ने COVID टीकाकरण को रोलआउट करने के लिए CoWIN ऐप लॉन्च किया था, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान कहा जाता है. योजना सभी का टीकाकरण, और यहां तक कि रक्त और अंग दान के लिए CoWIN का पुनरुत्पादन करना है. यह रोल आउट कैसे होगा इसका विवरण देते हुए शर्मा ने कहा,

यह भी अनिवार्य रूप से उसी हेल्‍थ स्टैक का एक हिस्सा है. जो CoWIN नागरिकों के लिए देता है; यह टीकाकरण केंद्रों का पता लगाने के लिए सेवाएं देता है, यह जानकारी प्रदान करता है कि टीके कहां उपलब्ध हैं और कौन-सा टीकाकरण सेंटर कौन सा टीका दे रहा है. अस्पताल अपने टीकाकरण टाइम टेबल प्रकाशित करने में सक्षम हैं. नागरिक के दृष्टिकोण से, वे सर्टिफिकेट डाउनलोड करने में सक्षम हैं. टीकाकरण के दृष्टिकोण से, वे एक व्यक्ति की पहचान करने और टीकाकरण करने में सक्षम हैं, है ना? ये सभी टीकाकरणकर्ता, अस्पताल, रोगी हितधारक हैं. अब, हम जो कह रहे हैं, वह यह है कि मूल रूप से COVID टीकाकरण और टीकाकरण में कोई अंतर नहीं है.

इसे भी पढ़ें: महामारी से सीख: मिलिए मध्य प्रदेश की कृष्णा मवासी से, जिनके किचन गार्डन ने उनके गांव को भुखमरी से बचाया

जबकि यह महत्वपूर्ण है कि हमारी हेल्‍थ सर्विस का डिजिटलीकरण किया जाए, भारत में हमारे पास आदिवासी जैसे कई कमजोर समूह हैं जो हाशिए पर हैं और उन्हें स्वास्थ्य सेवा की सबसे अधिक जरूरत है. यह पूछे जाने पर कि कमजोर समूह प्रौद्योगिकी का उपयोग कैसे करता है, शर्मा ने समावेशिता पर जोर दिया. उन्‍होंने कहा,

उदाहरण के लिए, CoWIN में, हमारे पास पहले से रजिस्‍ट्रेशन प्रोसेस था, लेकिन हमारे पास वॉक-इन की प्रणाली भी थी जहां लोग आकर टीकाकरण करवाते थे और डिजिटल रिपोर्ट बनाते थे. हमने विलेज लेवल पर हेल्‍प सेंटर और कॉमन सर्विस स्‍टेशन भी बनाए हैं, जो लोगों को इस प्रकार की छोटी डिजिटल सेवाएं देते हैं. और सौभाग्य से, अब हमारे पास मोबाइल नंबर हैं, कम से कम फीचर फोन सबके पास हैं. जैसे कोविड के दौरान हमने कहा था कि एक अकांउट में परिवार के छह सदस्यों को जोड़ा जा सकता है और डिजिटल रिकॉर्ड बनाए जा सकते हैं. इसी तरह, हमारे पास यह भी होगा. हर किसी के पास स्मार्टफोन होना जरूरी नहीं है. परिवार में एक सदस्य हो सकता है जिसके पास स्मार्टफोन हो, और फिर, आप जानते हैं, परिवार का प्रत्येक सदस्य उसमें आ सकता है.

इसे भी पढ़ें: जानें, स्वस्थ इंडिया के निर्माण के लिए हैंडवॉशिंग का महत्व

Highlights Of The 12-Hour Telethon

Reckitt’s Commitment To A Better Future

India’s Unsung Heroes

Women’s Health

हिंदी में पड़े

Folk Music For A Swasth India

RajasthanDay” src=