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संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा, “जलवायु संकट नियंत्रण से बाहर हो रहा है,” उन्होंने G20 देशों से 1.5 डिग्री के लक्ष्य पर कायम रहने का आग्रह किया

G20 शिखर सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा, “G20 लीडर्स को प्राथमिकता वाले दो क्षेत्रों में अपना नेतृत्व साबित करना होगा – जलवायु परिवर्तन को रोकना और सतत विकास लक्ष्यों को बचाना”

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“Climate Crisis Is Spiralling Out Of Control,” Says UN Chief, Urges G20 Nations To Keep “1.5 Degree Goal Alive”
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस (Antonio Guterres) ने कहा कि विकसित देशों को 2035 तक नेट शून्य तक पहुंचाना चाहिए

नई दिल्ली: G20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आए संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा,“हमारे पास खोने के लिए वक्त नहीं है. जितनी दूर तक हम देख सकते हैं वहां तक चुनौतियां फैली हुई हैं. जलवायु संकट और गंभीर होता जा रहा है, लेकिन सामूहिक प्रतिक्रिया में महत्वाकांक्षा, प्रामाणिकता और तत्परता की कमी है. ” गुटेरेस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जहां उन्होंने जलवायु से लेकर युद्ध और गरीबी तक के मुद्दे उठाए. मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ”गरीबी, भुखमरी और असमानताएं बढ़ रही हैं – लेकिन इन चुनौतियों से निपटने में वैश्विक एकजुटता की कमी दिख रही है. मैं G20 में एक सरल लेकिन जरूरी अपील के साथ आया हूं: हम इस तरह से नहीं चल सकते. हमें एक साथ आना होगा और सबकी भलाई के लिए मिलकर काम करना होगा. G20 नेताओं को प्राथमिकता वाले दो क्षेत्रों में अपना नेतृत्व दिखाना होगा.”

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जिन दो क्षेत्रों पर फोकस करना है वो हैं- जलवायु परिवर्तन को रोकना और सतत विकास लक्ष्यों को बचाना. जलवायु पर नेतृत्व के बारे में बात करते हुए, गुटेरेस ने कहा,

जलवायु संकट नियंत्रण से बाहर होता जा रहा है. कुल मिलाकर, G20 देश 80 फीसदी वैश्विक उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं. आधे-अधूरे उपाय जलवायु संकट से नहीं निपट पाएंगे.

नेतृत्व का क्या मतलब है? गुटेरेस ने इसे इस तरह समझाया:

  • 1.5 डिग्री के लक्ष्य को बनाए रखना
  • जलवायु न्याय पर आधारित विश्वास का पुनर्निर्माण करना
  • और हरित अर्थव्यवस्था के जरिए न्यायसंगत परिवर्तन को आगे बढ़ाना

उन्होंने कहा,

मैंने एक जलवायु एकजुटता संधि (Climate Solidarity Pact) को आगे बढ़ाया है – जिसमें बड़े पैमाने पर उत्सर्जन करने वाले देश इसमें कटौती के लिए अतिरिक्त प्रयास करते हैं; और अमीर देश इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समर्थन करते हैं. और इस साल की शुरुआत में, मैंने एक्सीलेरेशन एजेंडा के जरिए इन प्रयासों को सुपर चार्ज करने की एक योजना प्रस्तुत की थी. इसमें विकसित देशों से 2040 तक ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को शून्य स्तर तक पहुंचाने और उभरती अर्थव्यवस्थाओं से 2050 तक इस लक्ष्य के करीब पहुंचने का आग्रह किया गया है. आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) देशों को 2030 तक और बाकी देशों को 2040 तक कोयले को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने का आग्रह किया गया है.

गुटेरेस ने नई जीवाश्म ईंधन परियोजनाओं (New fossil fuel projects) की सभी लाइसेंसिंग या फंडिंग को खत्म करने की गुजारिश की. और 2035 तक (विकसित देशों में) और 2040 तक अन्य सभी देशों में सस्ती बिजली लाने को कहा.

जब जलवायु परिवर्तन को कम करने की बात आती है तो गुटेरेस ने विकासशील देशों के प्रति विकसित देशों की भूमिका के बारे में भी बात की. उन्होंने कहा,

नेतृत्व का मतलब विकसित देशों की तरफ से विकासशील देशों के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करना भी है , जिसमें 100 बिलियन डॉलर के लक्ष्य को पूरा करना, अनुकूलन वित्त को दोगुना करना, हरित जलवायु कोष को फिर से भरना और पिछले COP में हुए नुकसान और क्षति कोष को मेंटेन रखना शामिल है.

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सतत विकास (Sustainable development) के लिए 2030 एजेंडा के 17 एसडीजी (Sustainable development Goals) को 2015 में एक ऐतिहासिक संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलन में विश्व नेताओं ने अपनाया था. किसी को भी पीछे न छोड़ने के उद्देश्य के साथ वे आधिकारिक तौर पर 1 जनवरी 2016 को लागू हुए. ये सभी 17 लक्ष्य आपस में जुड़े हुए हैं और इन्हें 2030 तक हासिल किया जाना है. G20 देशों से एसडीजी को बचाने में नेतृत्व प्रदर्शित करने का आग्रह करते हुए, गुटेरेस ने उन महत्वपूर्ण उपायों को साझा किया जिनके तत्काल परिणाम मिलेंगे:

  • हर साल कम से कम 500 अरब डॉलर का एसडीजी प्रोत्साहन.
  • संकट में विकासशील देशों के लिए भुगतान निलंबन, लंबी ऋण शर्तों और उचित शर्तों पर कम दरों का समर्थन करने के लिए एक प्रभावी ऋण तंत्र.
  • विकासशील देशों के लिए उचित लागत पर बड़े पैमाने पर निजी वित्त का लाभ उठाने में सक्षम होने के लिए बहुपक्षीय विकास बैंकों (Multilateral Development Banks) के बिजनेस मॉडल में सार्थक पूंजीकरण और परिवर्तन.
  • जहां इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है वहां लिक्विडिटी (तरलता) बढ़ाने के लिए अप्रयुक्त विशेष आहरण अधिकारों की बेहतर पुनर्रचना.
  • और सब्सिडी में बदलाव – जीवाश्म ईंधन से ज्यादा टिकाऊ और उत्पादक विकल्पों की ओर.

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख का मानना है कि ये सभी तरीके एसडीजी प्रगति में तेजी लाएंगे और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को ऊर्जा, खाद्य प्रणालियों, डिजिटल, शिक्षा, स्वास्थ्य, नौकरियों और सामाजिक सुरक्षा जैसे प्रमुख बदलावों में निवेश करने में सहायता करेंगे.

उन्होंने एकता के संदेश के साथ अपनी बात का समापन किया, उन्होंने कहा,

यह सब पहुंच के अंदर है – लेकिन इसके लिए सभी को साथ आना होगा. कोई भी राष्ट्र, क्षेत्र, समूह – यहां तक कि G20 भी – इस लक्ष्य को अकेले हासिल नहीं कर सकता. हमें अपनी एक पृथ्वी को बचाने के लिए एक परिवार की तरह मिलकर काम करना होगा और हमारे एक भविष्य को बचाना होगा.

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