NDTV-Dettol Banega Swasth Swachh India NDTV-Dettol Banega Swasth Swachh India

ताज़ातरीन ख़बरें

दिल्ली की जहरीली हवा नई मांओं और बच्चों के स्वास्थ्य पर क्‍या असर डाल रही है

अपोलो हॉस्पिटल के सीनियर पीडीअट्रिशन और ग्रुप मेडिकल डायरेक्‍टर डॉ. अनुपम सिब्बल ने कहा कि एयर पॉल्‍यूशन से वयस्कों की तुलना में बच्चे अधिक प्रभावित होते हैं. इसलिए, उनकी शारीरिक गतिविधियों पर नियमित जांच रखना जरूरी है

Read In English
How Delhi's Toxic Air Is Affecting The Health Of New Mothers And Children
बिना किसी रेस्प्रिटॉरी हिस्‍ट्री के भी बच्चे एयर पॉल्‍यूशन से गंभीर रूप से प्रभावित होते हैं: डॉ. अनुपम सिब्बल

नई दिल्ली: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 303 होने के साथ दिल्ली में वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बनी हुई है. साइंसडायरेक्ट में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार वायु प्रदूषण के हाई लेवल के संपर्क में आने से जन्म के समय कम वजन और समय से पहले जन्म का खतरा बढ़ जाता है. अध्ययन में कहा गया है कि इसके अलावा, प्रदूषण जन्मजात विकृतियों और नवजात मृत्यु दर के जोखिम को भी बढ़ाता है. बच्चों में वायु प्रदूषण के प्रभाव पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के 15 साल से कम उम्र के लगभग 93 प्रतिशत (1.8 अरब) बच्चे हर दिन जहरीली हवा में सांस लेते हैं. इसके अलावा, पांच साल से कम उम्र के बच्चों में हर दस में से एक मौत और साथ ही 20% नवजात मौतों के लिए भी वायु प्रदूषण जिम्मेदार है.

अपोलो अस्पताल में वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ और समूह चिकित्सा निदेशक डॉ. अनुपम सिब्बल ने NDTV-डेटॉल बनेगा स्वस्थ इंडिया टीम से एयर पॉल्‍यूशन के बढ़ते लेवल और बच्चों और गर्भवती माताओं की हेल्‍थ पर इसके प्रभाव के बारे में बात की.

एनडीटीवी: बच्चों और शिशुओं पर दिल्ली के मौजूदा एयर पॉल्‍यूशन के लेवल का प्रभाव क्या हैं?

डॉ. अनुपम सिब्बल: माता-पिता इस बात को लेकर काफी चिंतित हैं कि दिल्ली में प्रदूषण का मौजूदा स्तर उनके बच्चों के स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित कर रहा है. आइए समझते हैं कि कैसे एक बच्चे का शरीर एक वयस्क से अलग होता है. यदि हम एक बच्चे की सांस लेने की दर को देखें, तो यह एक एडल्‍ट की तुलना में बहुत अधिक होती है. वायु प्रदूषण के समान लेवल से वयस्कों की तुलना में बच्चे अधिक प्रभावित होंगे. दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि एक बच्चे और एक एडल्‍ट की बॉडी में वायुमार्ग के आकार में अंतर होता है और इसके कारण, प्रदूषण के संपर्क में आने के कारण उत्पन्न होने वाले स्राव वायु प्रवाह के संदर्भ में अधिक सिकुड़ जाते हैं. यही कारण है कि बिना सांस की बीमारी की हिस्‍ट्री वाले बच्चे भी गंभीर रूप से प्रभावित होते हैं. अस्थमा या ब्रोंकाइटिस के इतिहास वाले बच्चों के लक्षण अधिक स्पष्ट होते हैं.

इसे भी पढ़ें: “डॉक्टर इलाज कर सकते हैं, नीति निर्माताओं को वायु प्रदूषण से निपटने की जरूरत है”: डॉ. रचना कुचेरिया

एनडीटीवी: बच्चों पर एयर पॉल्‍यूशन के लॉन्‍ग टर्म इफेक्‍ट क्या हैं?

डॉ. अनुपम सिब्बल: कुछ ऐसे सर्वे हैं जिन्होंने वायु प्रदूषकों के लंबे समय तक संपर्क में रहने, बच्चे के संज्ञानात्मक विकास और समय से पहले जन्म में वृद्धि के बीच संबंध दिखाया है. लेकिन, हम अभी भी वायु प्रदूषण के निश्चित दीर्घकालिक प्रभावों के प्रति अतिसंवेदनशील हैं. सामान्य प्रभावों की बात करें तो वायु प्रदूषण नाक की एलर्जी को बदतर बना देता है. इससे आंखों में जलन, ब्रोंकाइटिस आदि हो जाते हैं.

NDTV: वायु प्रदूषण से बाधित हुई नॉर्मल रूटिन में बच्चे और माता-पिता कैसे वापस आ सकते हैं?

डॉ. अनुपम सिब्बल: जैसे ही COVID-19 कंट्रोल में आ रहा था, वायु प्रदूषण का मुद्दा उठा. बाल रोग विशेषज्ञ के रूप में, हम माता-पिता को सलाह दे रहे हैं कि वे अपने बच्चों की शारीरिक गतिविधियों पर ध्यान दें.

एनडीटीवी: गर्भवती माताओं और नवजात शिशुओं के लिए आपकी क्या सिफारिशें हैं?

डॉ. अनुपम सिब्बल: बाल रोग विशेषज्ञ के रूप में, हम नवजात शिशुओं की देखभाल करते हैं, अक्सर गर्भवती महिलाओं के साथ बातचीत करते हैं, और कभी-कभी उन महिलाओं के साथ परामर्श करते हैं जो अपने पहले बच्चे को जन्‍म देना चाहती हैं या देने वाली हैं. तो, नवजात शिशुओं को बढ़ते प्रदूषण के स्तर से दूर रखने के लिए हम क्या कर सकते हैं? खैर, वे वास्तव में ज्यादातर समय घर पर ही रहते हैं, लेकिन थोड़ा बाहर टहलना शिशु और मां के लिए फायदेमंद होता है, हालांकि, आज हम जिस वातावरण में रहते हैं, उसमें यह वांछनीय नहीं है. इसलिए, घर के अंदर रहें. जहां तक गर्भवती महिलाओं का संबंध है, हम हमेशा उन्हें प्रोत्साहित करते हैं कि वे एक्‍सरसाइज जारी रखें और एक दिनचर्या बनाए रखें, विशेष रूप से घर के अंदर.

NDTV: माता-पिता और बच्चों के लिए क्या करें और क्या न करें?

डॉ. अनुपम सिब्बल: माता-पिता, बच्चों, और गर्भवती और नई माताओं के लिए पहली सिफारिश मुख्य रूप से उस वातावरण के बारे में जागरूकता है जिसमें वे रह रहे हैं और जब संभव हो तो बाहर जा रहे हैं. वयस्क एक मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग कर सकते हैं जो शहर का सटीक वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) प्रदान करता है. जब बाहर टहलने और बाहर व्यायाम करने की बात आती है, तो हमें दिन का ऐसा समय चुनना चाहिए जब AQI का स्तर कम हो. मास्क लगाना एक अन्य महत्वपूर्ण कारक है, और अच्छे N95 की सलाह दी जाती है. कोविड-19 महामारी ने एक अच्छी बात यह की है कि मास्क लगाना हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है. कोई भी अपने घरों में इनडोर पौधों जैसे चीनी सदाबहार, स्‍नैक प्‍लांट आदि रखने पर विचार कर सकता है, क्योंकि यह हवा की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद करता है. जिन लोगों के पास संसाधन हैं, वे एयर प्यूरिफायर खरीद सकते हैं क्योंकि वे काम में आते हैं.

डॉ. सिब्बल ने अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए निर्णय लेने के लिए परिवार में वयस्कों के महत्व पर बल दिया. उन्‍होंने कहा,

हमें यह समझने की जरूरत है कि हम उनकी आवाज हैं. हमें अपनी आने वाली पीढ़ी की रक्षा करनी है और प्रदूषण पर काबू पाने के लिए हमें अपनी शक्ति में सब कुछ करना चाहिए.

इसे भी पढ़ें: पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. सत्यनारायण मैसूर से जानिए, दिल्ली की जहरीली हवा का हेल्‍थ पर क्‍या असर पड़ रहा हैं?

Highlights: Banega Swasth India Launches Season 10

Reckitt’s Commitment To A Better Future

India’s Unsung Heroes

Women’s Health

हिंदी में पढ़ें

This website follows the DNPA Code of Ethics

© Copyright NDTV Convergence Limited 2024. All rights reserved.