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आर्थिक सर्वेक्षण 2023 की मुख्य विशेषताएं: सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य और ‘किसी को पीछे नहीं छोड़ना’, सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण प्राथमिकता

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए इकोनॉमिक सर्वे 2023 में बजट 2023 के अन्य फोकस एरिया के साथ-साथ भारत के हेल्थकेयर और न्यूट्रिशनल प्रोग्राम की उपलब्धियों के बारे में बात की गई.

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Economic Survey 2023 Highlights: Quality Health For All & Leaving No One Behind, An Important Priority For The Government

नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी (बुधवार) को केंद्रीय बजट 2022 से पहले (31 जनवरी) लोकसभा में आर्थिक सर्वेक्षण 2023 पेश किया. वार्षिक आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, 1 अप्रैल से शुरू होने वाले अगले वित्तीय वर्ष के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि 6-6.8% है, जो चालू वर्ष के लिए अनुमानित 7% से कम है. आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि इसके बावजूद प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में भारत की वृद्धि अभी भी सबसे तेज रहने की उम्मीद है.

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यहां स्वास्थ्य सेवा, पोषण, स्वस्थ और स्वच्छ भारत, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों पर आर्थिक सर्वेक्षण 2023 के प्रमुख अंश दिए गए हैं:

1. स्वास्थ्य सरकार के लिए सामाजिक कल्याण का एक अभिन्न अंग है. आर्थिक सर्वेक्षण 2022-23 के अनुसार व्यापक और ‘किसी को पीछे नहीं छोड़ना’ दृष्टिकोण स्वास्थ्य सेवा के मार्गदर्शक सिद्धांत हैं.

2. प्री-बजट सर्वे में कहा गया है कि नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं का प्रावधान सुनिश्चित करना सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण प्राथमिकता है. इस उद्देश्य की दिशा में, मिशन इंद्रधनुष, प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत, कोविड-19 वैक्सीनेशन प्रोग्राम, आयुष्मान डिजिटल मिशन जैसी कई बहुआयामी पहलें शुरू की गई हैं और नागरिकों के बेहतर समग्र स्वास्थ्य के लिए आगे बढ़ाई गई हैं.

3. नेशल हेल्थ मिशन के तहत, सरकार ने सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज प्राप्त करने और सस्ती कीमत पर सभी को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए सभी संबंधित क्षेत्रों और हितधारकों के साथ जुड़ने के लिए ठोस प्रयास किए हैं.

4. इकोनॉमिक सर्वे में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि भारतीय स्वास्थ्य सेवा नेटवर्क दुनिया में सबसे बड़ा है. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) के लेटेस्ट एडिशन में संकेतित स्वास्थ्य संबंधी कुछ महत्वपूर्ण संकेतकों में सुधार के रूप में एक प्रभावी स्वास्थ्य दृष्टिकोण के रिजल्ट दिखाई दे रहे हैं:

a. इंस्टिट्यूशनल बर्थ 2015-16 में 78.9% से बढ़कर 2019-2021 में 88.6% हो गया है

b. नवजात मृत्यु दर (प्रति 1000 जीवित जन्म) 2015-16 में 29.5 से घटकर 2019-2021 में 24.9 हो गई

c. शिशु मृत्यु दर (प्रति 1000 जीवित जन्म) में भी एनएफएचएस 4 (2015-16) में 40.7 से घटकर एनएफएचएस 5 में 35.2 हो गई

d. पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर (प्रति 1000 जीवित जन्म) एनएफएचएस 4 (2015-16) में 49.7 से घटकर एनएफएचएस 5 में 41.9 हो गई

e. चिल्ड्रन वैक्सीनेशन के मामले में, 12-23 महीने की उम्र के बच्चे, जिन्हें वैक्सीनेशन कार्ड के आधार पर पूरी तरह से टीका लगाया गया है, 2016 में 62.0% से बढ़कर 2021 में 76.4 हो गया

f. 6 महीने से कम उम्र के बच्चे, जिन्हें विशेष रूप से स्तनपान कराया गया था, उनमें भी 2016 में 54.9% से बढ़कर 2021 में 63.7% हो गया

g. कुपोषण के संदर्भ में, 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे जो नाटे हैं (उम्र के अनुसार कद) में सुधार देखा गया है क्योंकि इस ब्रैकेट में आने वाले बच्चों का प्रतिशत एनएफएचएस-4 में 38.4% से एनएचएफएस-5 में 35.5% तक कम हो गया है. जब 5 साल से कम उम्र के बच्चों की बात आती है जो कमजोर (ऊंचाई के लिए वजन) हैं, तो एनएफएचएस-4 से एनएफएचएस-5 में 21.0% से 19.3% की कमी देखी गई और 5 साल से कम वजन वाले बच्चों के मामले में, से कमी देखी गई. इसी अवधि में 35.8% से 32.1% की कमी देखी गई.

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5. सर्वे में कहा गया है कि सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने 2020 तक मातृ मृत्यु दर (MMR) को 100 प्रति लाख जीवित जन्मों से नीचे लाने के लिए सफलतापूर्वक प्रमुख मील का पत्थर हासिल किया है (राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में निर्धारित) ) इसे 2014-16 में 130 प्रति लाख जीवित जन्म से 2018-20 में 97 प्रति लाख जीवित जन्म पर लाकर ये उपलब्धि हासिल की है. इसमें आगे कहा गया है कि आठ राज्यों ने 2030 तक एमएमआर को प्रति लाख जीवित जन्मों पर 70 से कम करने के एसडीजी लक्ष्य को पहले ही हासिल कर लिया है. इनमें केरल (19) महाराष्ट्र (33) तेलंगाना (43) आंध्र प्रदेश (45) तमिलनाडु (54) झारखंड (56) गुजरात (57) और कर्नाटक (69) शामिल हैं.

6. आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि हाल के वर्षों में सभी स्तरों पर स्कूल छोड़ने की दर में लगातार गिरावट देखी गई है. गिरावट लड़कियों और लड़कों दोनों के लिए है. समग्र शिक्षा, शिक्षा का अधिकार अधिनियम, स्कूल के बुनियादी ढांचे और सुविधाओं में सुधार, आवासीय छात्रावास भवन, शिक्षकों की उपलब्धता, शिक्षकों का नियमित प्रशिक्षण, मुफ्त पाठ्यपुस्तकें, बच्चों के लिए यूनिफॉर्म, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और पीएम पोषण योजना जैसी योजनाएं स्कूलों में बच्चों का नामांकन बढ़ाने और उन्हें बनाए रखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. सर्वेक्षण में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि 2022 में स्कूलों में लड़कियों या लड़कों के लिए अलग शौचालय, पीने के पानी और हाथ धोने की सुविधाओं जैसी बुनियादी सुविधाओं में सुधार जारी रहा. समग्र शिक्षा योजना के तहत स्कूलों में पेयजल और स्वच्छता को प्राथमिकता देने के साथ-साथ स्वच्छ भारत मिशन ने आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने और स्कूलों में इन परिसंपत्तियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

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7. इस बार, आर्थिक सर्वेक्षण में भारत के सोशल सेक्टर और क्लाइमेट चेंज और एनवायरनमेंट पर चैप्टर भी पेश किया गया है. सर्वेक्षण में कहा गया है कि समाज कल्याण सरकार के लिए बाद का विचार नहीं है, बल्कि उसका मूलमंत्र है. व्यापक और ‘कोई भी पीछे न छूटे’ दृष्टिकोण हेल्थकेयर के मार्गदर्शक सिद्धांतों का निर्माण करता है.

8. सर्वे में यह भी उल्लेख किया गया है कि जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण विश्व स्तर पर ना केवल गंभीर मुद्दे हैं बल्कि भारत के लिए अपनी आकांक्षाओं को साकार करने के लिए महत्वपूर्ण हैं. इसमें कहा गया है कि इसलिए, भारत वर्तमान में अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) के माध्यम से सबसे मजबूत क्लाइमेट एक्शन में से एक का नेतृत्व करता है, जिसमें दुनिया में स्वच्छ ऊर्जा के लिए बदलाव के लिए एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम शामिल है और अर्थव्यवस्था पर कोविड-19 के प्रतिकूल प्रभावों के बावजूद, देश ने अपनी जलवायु महत्वाकांक्षा को कई गुना बढ़ा लिया है.

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