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ब्लॉग: सेल्फ-केयर के माध्यम से गर्भनिरोधक विकल्पों की पुनर्कल्पना

भारत के फैमिली प्लानिंग प्रोग्राम ने अपनी व्यापक पहुंच, बेहतर सर्विस क्वालिटी, कॉन्ट्रासेप्टिव मेथड (गर्भनिरोधक तरीकों) की बड़ी रेंज और फाइनेंशियल इन्वेस्टमेंट के मामले में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है

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Blog: Reimagining Contraceptive Choices Through Self-Care

शारीरिक स्वायत्तता प्रत्येक व्यक्ति को यह अधिकार दिया गया है कि उसे यह नियंत्रित करने का अधिकार है कि उसे अपने शरीर के साथ क्या करना चाहिए या क्या नहीं करना चाहिए। शारीरिक स्वायत्तता (bodily autonomy) यानी हर व्यक्ति को यह अधिकार दिया जाना कि उसे यह नियंत्रित करने का अधिकार है कि उसे अपने शरीर के साथ क्या करना चाहिए या क्या नहीं करना चाहिए. जिस पर हो रहीं चर्चाएं लंबे समय से विवादास्पद रही हैं. वहीं COVID-19 महामारी की वजह से लगाए गए प्रतिबंधों ने प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं (reproductive health services) तक पहुंच के मुद्दे को और मुश्किल बना दिया है. उपलब्ध गर्भनिरोधक विकल्पों की रेंज के अंदर, शारीरिक स्वायत्तता पर चल रही चर्चा में सेल्फ-केयर की भूमिका के महत्व को समझना बहुत जरूरी है, क्योंकि यह गर्भनिरोधक के विकल्पों का विस्तार करने, समानता का अधिकार सुनिश्चित करने और परिवार नियोजन करने के मामले में, महिलाओं के अधिकारों और लैंगिक न्याय के भारत के दृष्टिकोण के लिए आवश्यक है.

समय के साथ भारत के परिवार नियोजन कार्यक्रम (family planning program) ने अपनी व्यापक पहुंच, बेहतर सर्विस क्वालिटी, कॉन्ट्रासेप्टिव मेथड (गर्भनिरोधक तरीकों) की बड़ी रेंज और फाइनेंशियल इन्वेस्टमेंट के मामले में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की हैं. उदाहरण के तौर पर, प्यू रिसर्च सेंटर (Pew Research Center) की रिपोर्ट के मुताबिक, कुल प्रजनन दर (total fertility rate) 1992 में 3.4 से घटकर 2019 में 2.0 हो गई है. अपूरित आवश्यकताओं (unmet needs) में भी 13% से 9% तक की उल्लेखनीय कमी आई है. यही नहीं अंतर्गर्भाशयी गर्भनिरोधक उपकरण (Intrauterine Contraceptive Device – IUCD), गोलियां (pills), कंडोम और इंजेक्टेबल्स जैसे रिवर्सेबल मेथड के इस्तेमाल में भी तेजी देखी गई है.

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हालांकि, सात दशकों से इस दिशा में हो रहे निरंतर प्रयासों के बावजूद, कई चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं: विकल्पों तक सीमित पहुंच आज भी बनी हुई है, मैथड मिक्स skewed बना हुआ है (37.9% महिलाओं की नसबंदी), कई जरूरतें अभी भी पूरी नहीं हुई हैं और फैमिली प्लानिंग मेथड के इस्तेमाल में सामाजिक आर्थिक अंतर (socio economic gap) अब भी बना हुआ हैं. skewed method mix के लिए कई कारण जिम्मेदार हैं, जैसे गर्भनिरोधक के इस्तेमाल से जुड़े मुद्दे और गर्भनिरोधक से संबंधित जबरदस्ती लादी जाने वाली प्रथाओं की मौजूदगी.

कॉन्ट्रासेप्टिव मेथड मिक्स को skewed कहा जाता है यदि 50% या उससे ज्यादा कॉन्ट्रासेप्टिव यूजर एक ही मेथड पर भरोसा करते हैं.

मौजूदा हालातों को बदलने के लिए सबसे पहले तो लोगों में इस विषय को लेकर जागरूकता बढ़ाने, मांग को बढ़ावा देने, मैथड सेलेक्शन में गाइड करने और परिवार नियोजन के तरीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना सेवा प्रदाताओं यानी सर्विस प्रोवाइडर के लिए बहुत जरूरी है. ग्लोबल हेल्थ: साइंस एंड प्रैक्टिस पर पब्लिश सोलो जे, फेस्टिन एम (Solo J, Festin M) के एक रिव्यू पेपर के मुताबिक, यह स्वीकार करना जरूरी है कि पूर्वाग्रह, जिसमें क्लाइंट की उम्र, समानता की स्थिति, पति की सहमति और वैवाहिक स्थिति जैसे कई कारण शामिल हो सकते हैं, जो महिलाओं के चुने कॉन्ट्रासेप्टिव मेथड में रुकावट डाल सकते हैं. इस पूर्वाग्रह में कुछ तरीकों के इस्तेमाल पर ज्यादा जोर देना और ठोस चिकित्सा तर्क के अभाव में दूसरे तरीकों को दरकिनार करना भी शामिल है, साथ ही क्लाइंट की पसंद को जानने और उसका सम्मान करने में असफल होना भी इसमें शामिल है.

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दूसरा, परिवार नियोजन नीतियों (family planning policies) का लक्ष्य आधुनिक प्रतिवर्ती तरीकों (modern reversible methods) की ओर मुड़ना है. जबकि महिलाएं अक्सर गर्भनिरोधक की प्राथमिक जिम्मेदारी निभाती हैं, फिर भी, पितृसत्तात्मक नियंत्रण महिलाओं के गर्भनिरोधक निर्णयों को काफी हद तक प्रभावित करता है. जो महिलाओं के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है.

यहीं पर खुद की देखभाल यानी सेल्फ -केयर का कॉन्सेप्ट सामने आता है. WHO इसे “व्यक्तियों, परिवारों और समुदायों की स्वास्थ्य को बढ़ावा देने, बीमारी को रोकने, स्वास्थ्य बनाए रखने और हेल्थ केयर प्रोवाइडर के सपोर्ट के साथ या उसके बिना बीमारी और विकलांगता से निपटने की क्षमता” के रूप में परिभाषित करता है. फैमिली प्लानिंग यानी परिवार नियोजन में सेल्फ-केयर का मतलब क्लाइंट को उनके प्रजनन विकल्पों और लक्ष्यों के मुताबिक बिना किसी के दबाव के उनकी इच्छा के मुताबिक एक तरीका चुनने के लिए शिक्षित करना और सूचित करना शामिल है.

“गर्भनिरोधक का डी-मेडिकलाइजेशन” इंडिविजुअल्स को हेवी मेडिकल इंटरवेंशन या प्रिस्क्रिप्शन की जरूरत के बिना अपने कॉन्ट्रासेप्टिव डिसीजन और मेथड सेलेक्ट करने के लिए ज्यादा कंट्रोल और रिस्पॉन्सिबिलिटी लेने में सशक्त बनाने की वकालत करता है. इस मामले में सेल्फ-केयर इंटरवेंशन महिलाओं को खुद निर्णय लेने की स्वतंत्रता प्रदान करके यौन और प्रजनन स्वास्थ्य अधिकारों में सुधार के लिए एक जरूरी मार्ग बनकर उभरा है. ये तरीका बार-बार हेल्थ केयर जाने, मेथड एक्सेसिबिलिटी और कॉन्ट्रासेप्टिव के इस्तेमाल से जुड़ी बाधाओं को कम करने की क्षमता प्रदान करता है. सेल्फ-केयर के मैथड में न केवल सेक्सुअली एक्टिव एडल्ट्स की गर्भनिरोधक आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता है, बल्कि किशोरों की बढ़ती गर्भनिरोधक जरूरतों को भी पूरा करने की ताकत है. ये तरीके इस संवेदनशील मामले में उनकी गोपनीयता को बनाए रखते हुए किशोरों में अनचाहे गर्भधारण के मामलों को कम करने में मदद कर सकते हैं. इसके अलावा, यदि इंडिविजुअल हेल्थ केयर वर्करों पर निर्भर हुए बिना परिवार नियोजन के तरीकों को शुरू कर सकते हैं और उन्हें जारी रख सकते हैं, तो सीमित पहुंच और इसकी वजह से होने वाले परिवार नियोजन के इस्तेमाल में सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

मार्केट में पहले से ही कई सेल्फ-केयर से जुड़ी चीजें उपलब्ध हैं, जैसे कम्बाइन्ड ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स (मौखिक गर्भनिरोधक गोलियां), प्रोजेस्टिन-ओनली पिल्स, इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स (आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियां), पुरुष और महिला कंडोम, साथ ही लैक्टेशनल एमेनोरिया मेथड, जिसे बेहतर जागरूकता और न्यूनतम चिकित्सा हस्तक्षेप के साथ सुरक्षित और प्रभावी ढंग से खुद ही किया जा सकता है. दरअसल लैक्टेशनल एमेनोरिया मेथड एक प्राकृतिक गर्भनिरोधक तरीका होता है, जिसमें स्तनपान को गर्भनिरोधक के प्रभावी उपाय के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है.

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2016 में भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए ‘मिशन परिवार विकास’ के तहत नए शादीशुदा जोड़ों को एक सेल्फकेयर किट दी जाती है, जिसमें कंडोम, आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियां और प्रिग्नेंसी किट होती है. ये सेल्फ-केयर किट रिप्रोडक्टिव-ऐज कपल्स यानी प्रजनन की उम्र वाले कपल्स के बीच सेल्फ-केयर को बढ़ावा देने के लिए सरकार की एक शानदार रणनीति रही है. वहीं DMPA-SC (सबक्यूटेनियस डिपो मेड्रोक्सीप्रोजेस्टेरोन एसीटेट) की हाल ही में हुई शुरुआत महिलाओं को अपनी इच्छा से परिवार नियोजन का विकल्प चुनने के लिए सशक्त बनाने के मकसद से शुरू किए गए एक महत्वपूर्ण पॉलिसी डिसीजन का प्रतीक है. इस मेथड को न केवल सेल्फ-इंजेक्ट किया जा सकता है, बल्कि महिलाएं इन्हें कई डिलीवरी चैनलों (फार्मेसियों) के माध्यम से हासिल भी कर सकती हैं, जिससे उन्हें हेल्थ केयर प्रोवाइडर्स के साथ बार-बार संपर्क करने की जरूरत नहीं पड़ती है. इस तरह, DMPA-SC जैसे सेल्फ-केयर इंटरवेंशन महिलाओं को अपने गर्भनिरोधक और प्रजनन विकल्पों से जुड़े फैसलों पर ज्यादा नियंत्रण लेने में मददगार साबित होंगे और इनकी बढ़ी हुई उपलब्धता, बेहतर गोपनीयता, और गर्भनिरोध के विकल्पों में इजाफा महिलाओं को सशक्त बनाने में मदद करेगा.

सेल्फ-केयर यानी खुद की देखभाल करने की वकालत करना और उसके लिए एक सही वातावरण सुनिश्चित करना जिसमें सेल्फ-केयर इंटरवेंशन सुरक्षित और उचित तरीकों से उपलब्ध कराया जा सके, जरूरी है. सेल्फ-केयर के लिए एक सही वातावरण बनाने के लिए नई मेडिकल और डिजिटल टेक्नोलॉजी, गुड्स और सर्विसेज की अवेलेबिलिटी यानी उपलब्धता बहुत जरूरी है, ताकि क्लाइंट अपने प्रजनन से जुड़े मामलों के बारे में सही निर्णय ले सकें और पूर्वाग्रहों से मुक्त होकर मनचाहा प्रजनन परिणाम हासिल करने के लिए उन्हें अपना सकें. सेल्फ-केयर के कॉन्सेप्ट को अपनाकर, हम पारंपरिक मानदंडों से आजाद हो सकते हैं और कई गर्भनिरोधक विकल्पों के साथ लोगों को सशक्त बना सकते हैं. सेल्फ-केयर के फ्रेमवर्क के भीतर गर्भनिरोधक के विकल्पों की पुनर्कल्पना करना लोगों को उनके प्रजनन स्वास्थ्य के बारे में सही निर्णय लेने में सशक्त बनाने के लिए आवश्यक है.

(यह लेख सामाजिक प्रभाव सलाहकार, संबोधि रिसर्च एंड कम्युनिकेशंस में सीनियर मैनेजर आयुषी रस्तोगी और रिसर्च एंड डेवलपमेंट एसोसिएट मनीषा चौधरी के द्वारा लिखा गया है.)

डिस्क्लेमर: ये लेखकों की अपनी निजी राय है.

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