NDTV-Dettol Banega Swasth Swachh India NDTV-Dettol Banega Swasth Swachh India

कोरोनावायरस के बारे में

BA.2.75 जैसे नए COVID-19 वेरिएंट और सब-वेरिएंट को ट्रैक करने के लिए, जीनोमिक निगरानी जारी रखें: डॉ. संदीप बुद्धिराजा

मैक्स हेल्थकेयर के ग्रुप मेडिकल डायरेक्टर डॉ. संदीप बुद्धिराजा ने कहा कि भारत और 10 अन्य देशों से COVID-19 रोग पैदा करने वाले वायरस का एक नया सब-वेरिएंट, जिसे BA.2.75 कहा जाता है, के BA.5 को बदलने की संभावना है

Read In English
Highlights
  • COVID-19 सब-वेरिएंट BA.2.75 पहली बार भारत से पाया गया था: WHO
  • वर्तमान में, BA.5 और BA.4 यूरोप और अमेरिका में प्रमुख रूप हैं
  • यह संभावना है कि BA.2.75 वास्तव में BA.5 की जगह ले सकता है: डॉ. बुद्धिराजा

नई दिल्ली: 16 जून से, भारत में डेली COVID-19 मामलों में वृद्धि देखी जा रही है, हर दिन 10,000 से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं. इस बीच, भारत से और फिर लगभग 10 अन्य देशों से BA.2.75 नामक एक नई सब-वेरिएंट मिला है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) नए सब-वेरिएंट के उद्भव पर नज़र रख रहा है. सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में, डब्ल्यूएचओ की मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने कहा, “विश्लेषण करने के लिए सब-वेरिएंट के अभी भी लिमिटेड सीक्वेंस उपलब्ध हैं, लेकिन इस सब-वेरिएंट के स्‍पाइक प्रोटीन के रिसेप्टर-बाइंडिंग डोमेन पर कुछ म्‍यूटेशन होते हैं. तो जाहिर है, यह वायरस का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो खुद को मानव रिसेप्टर से जोड़ता है. तो, हमें यह देखना होगा. यह जानना अभी भी जल्दबाजी होगी कि क्या इस सब-वेरिएंट में एडिशनल इम्‍यूनिटी इवेश़न के गुण हैं या वास्तव में अधिक चिकित्सकीय रूप से गंभीर हैं.”

बनेगा स्वस्थ इंडिया की टीम ने बढ़ते COVID-19 मामलों, नए सब-वेरिएंट और टीकों के बारे में सभी सवालों के जवाब पाने के लिए मैक्स हेल्थकेयर के समूह चिकित्सा निदेशक डॉ. संदीप बुद्धिराजा से विशेष रूप से बात की. पेश हैं बातचीत के कुछ अंश.

NDTV: भारत में मामलों में हालिया तेजी कितनी चिंताजनक है?

डॉ. संदीप बुद्धिराजा: मामलों में वृद्धि चिंता की बात नहीं है. हमें कोरोनावायरस की प्रकृति को समझने की जरूरत है और यह कैसे व्यवहार करने वाला है. हम पिछले वर्षों में बहुत से म्‍यूटेशन होते हुए देख रहे हैं. ये म्‍यूटेशन वायरस के जीवित रहने का एक तरीका है और वायरस म्‍यूटेशन होता रहेगा. अच्छी बात यह है कि इन परिवर्तनों के बावजूद, रोग की गंभीरता काफी कम हो गई है, इसलिए अब हम बहुत कम संख्या में लोगों को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता देख रहे हैं; बहुत कम लोग जो बहुत बीमार होंगे और मौतें बहुत ही असामान्य हो गई हैं. अधिकांश लोगों को बहुत ही हल्की बीमारी हो रही है, यहां तक कि कई बार बिना लक्षण वाले रोग भी हो रहे हैं. संख्या बढ़ रही है लेकिन आप दुनिया भर में इस प्रवृत्ति को देखते हैं. हर बार जब संख्या बढ़ती है, तो यह दुनिया के विभिन्न हिस्सों से एक नई सब-वेरिएंट की रिपोर्ट के साथ मेल खाती है. सावधानी बरतने और यह समझने की जरूरत है कि महामारी अभी खत्म नहीं हुई है. लेकिन चिंतित होने का कोई कारण नहीं है.

इसे भी पढ़ें: सुंदरबन में स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच को प्रभावित करती है भौगोलिक अतिसंवेदनशीलता

NDTV: नए सब-वेरिएंट BA.2.75 के उद्भव के बारे में किसी को कितना चिंतित होना चाहिए, जो भारत और 10 अन्य देशों में पाया गया है? हम इसके बारे में कितना जानते हैं?

डॉ. संदीप बुद्धिराजा: भारत और 10 अन्य देशों ने बीए.2.75 पाया गया है, लेकिन मुझे यकीन है, जो रिपोर्ट की जा रही है, उससे कहीं अधिक व्यापक है. यूरोप और अमेरिका में, यह BA.5 और कुछ हद तक BA.4 है जो अब प्रमुख वेरिएंट है. लेकिन जिस तरह से चीजें चल रही हैं, यह संभावना है कि BA.2.75 वास्तव में BA.5 की जगह ले सकता है. लेकिन अच्छी खबर यह है कि अभी तक इन सभी प्रकारों के बारे में यह नहीं बताया गया है कि एएस गंभीर बीमारी का कारण बना है. इन सभी वेरिएंट्स के बीच एक कॉमन बात यह है कि ये ज्यादा ट्रांसमिसिबल हैं और यही वजह है कि ये पिछले वेरिएंट को रिप्लेस कर देते हैं. जनवरी 2022 में, ओमिक्रॉन ने डेल्टा की जगह ले ली. जैसे-जैसे अधिक म्‍यूटेशन वायरस को अधिक संक्रमणीय बनाते हैं, यह पिछले वेरिएंट को बदल देते हैं.

सभी प्रकारों के बीच अन्य सामान्य विशेषता यह है कि वायरस के स्पाइक प्रोटीन के रिसेप्टर बाइंडिंग डोमेन के क्षेत्रों में उनके म्‍यूटेशन होते हैं. यह वायरस का वह महत्वपूर्ण प्रोटीन है जिसके माध्यम से यह मानव कोशिका से जुड़ जाता है. वायरस के इस हिस्से में कोई भी म्‍यूटेशन बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वही तय करता है कि यह वायरस मानव कोशिकाओं में कितना आक्रामक होगा और इस तरह यह गंभीरता को निर्धारित करता है. दूसरे, यह यह भी निर्धारित करता है कि पिछले टीकाकरण और संक्रमण ने आपको इस नए म्‍यूटेशन या सब-वेरिएंट के खिलाफ कुछ प्रतिरक्षा प्रदान की है या नहीं. जो हम तेजी से देख रहे हैं वह यह है कि एक इम्‍यून इस्‍केप की घटना है जिसका अर्थ है कि पिछले टीकाकरण और संक्रमण आपको इस वर्तमान म्‍यूटेशन के खिलाफ पर्याप्त सुरक्षा नहीं दे रहे हैं. यानी आप दोबारा संक्रमित हो सकते हैं. उदाहरण के लिए, एक व्यक्ति जिसने टीके की डोज और एक बूस्टर शॉट दोनों लिया है, उस व्यक्ति को इन संक्रमणों के होने का जोखिम उतना ही है जितना कि टीका नहीं लगवाने वाले व्‍यक्ति को है. इसी तरह, यदि किसी व्यक्ति को अतीत में COVID-19 संक्रमण हुआ है और उसने सुरक्षात्मक एंटीबॉडी विकसित कर ली हैं, तब भी उसे संक्रमण होने का खतरा होता है. लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि टीके प्रभावी नहीं हैं? नहीं यह सच नहीं है. हो सकता है कि टीके आपको नए म्यूटेंट स्ट्रेन के माध्यम से संक्रमित होने से न रोकें, लेकिन आपके संक्रमण की गंभीरता को स्पष्ट रूप से कम कर देता है.

NDTV: इन नए वेरिएंट को देखते हुए भारत को किस तरह की रणनीति में बदलाव करना चाहिए? जैसे, भारत ने हाल ही में दूसरी डोज और बूस्टर डोज के बीच के अंतर को कम किया है.

डॉ. संदीप बुद्धिराजा: दूसरी खुराक और बूस्टर शॉट के बीच के अंतर को कम करना एक स्वागत योग्य निर्णय है. हम देखते हैं कि किसी भी ब्रांड या प्रकार के COVID-19 के किसी भी टीकाकरण के साथ, प्रतिरक्षा अल्पकालिक होती है और टीकाकरण के कुछ महीनों के भीतर एंटीबॉडी कम होने लगती हैं. लेकिन, याद रखें, एंटीबॉडी के लेवल में कमी का मतलब यह नहीं है कि आप अब सुरक्षित नहीं रहेंगे. शरीर में इम्यून मेमोरी नाम की कोई चीज होती है जो दोबारा संक्रमित होने पर ट्रिगर हो जाती है. वहीं, जी हां, करीब चार से छह महीने बाद एंटीबॉडी का स्तर नीचे चला जाता है और इसलिए बूस्टर शॉट दिया जाता है.

हमारी बहुत सी आबादी को पहले से ही एक नेचुरल इंफेक्‍शन है. तो, बूस्टर और प्राकृतिक बीमारी के साथ टीकाकरण का कॉम्बिनेशन आपको हाइब्रिड इम्‍यूनिटी देती है और यह सबसे मजबूत प्रकार की इम्‍यूनिटी है.

इसे भी पढ़ें: मिलिए एक ऐसे पद्म श्री पुरस्कार विजेता डॉक्टर से जो सुंदरबन के लोगों का करते हैं फ्री इलाज

NDTV: क्या टीके अभी भी सभी प्रकारों से हमारी रक्षा कर रहे हैं?

डॉ. संदीप बुद्धिराजा: हम खुद को गंभीर बीमारी से बचाने के लिए टीके लगाते हैं. मौजूदा टीके आपको नए वेरिएंट से संक्रमण होने से नहीं बचाएंगे. इसे ब्रेकथ्रू इंफेक्शन कहते हैं. आप संक्रमित हो जाएंगे, लेकिन टीकाकरण आपको एक गंभीर बीमारी से बचाएगा.

आगे हमें नेक्स्ट जेनरेशन के टीकों पर गौर करने की जरूरत है. अभी, दुनिया भर में COVID के टीके, जिनके बारे में हम जानते हैं, विशेष रूप से COVID के शुरुआती रूपों वुहान, अल्फा और डेल्टा के खिलाफ हैं. दुनिया अब नए टीकों को जानना चाहती है और हमारे पास निकट भविष्य में वे टीके होने चाहिए, कम से कम पश्चिमी दुनिया में जहां ये टीके विशेष रूप से नए वेरिएंट को पूरा करेंगे. उम्मीद है, अब आपके पास BA.2, BA.4 और BA.5 के टीके होंगे.

फ्लू के टीके के साथ भी ऐसा ही होता है. हर साल, सर्दियों की शुरुआत में या मानसून के तुरंत बाद, हम फ्लू का टीका लगवाते हैं. यह एक वार्षिक टीका है क्योंकि हर साल, सबसे प्रमुख फ्लू वायरस के आधार पर टीके की संरचना बदल जाती है. मुझे लगता है कि जहां तक COVID टीकों का संबंध है, हम ऐसी ही स्थिति में हैं. दुनिया के पास तकनीक है.

NDTV: हम नए रूपों और सब-वेरिएंट की निगरानी कैसे कर रहे हैं?

डॉ. संदीप बुद्धिराजा: दुनिया के हर देश को अपनी जीनोमिक निगरानी जारी रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि म्यूटेंट और सब-वेरिएंअ का पता तभी लगाया जा सकता है जब निगरानी एक सतत प्रक्रिया हो. भारत में, हम इस वजह से नए वेरिएंट BA.2.75 का पता लगाने में सक्षम थे. यदि आप जल्दी पता लगाने में सक्षम हैं, तो आप ट्रांसमिशन को कम कर सकते हैं, क्योंकि तब आप राष्ट्रीय स्तर के नियंत्रण में जाने के बजाय स्थानीय नियंत्रण की रणनीति को फिर से शुरू कर सकते हैं.

म्‍यूटेशन का जल्‍द पता लगाने से रोग का बड़े क्षेत्रों में ट्रांसमिशन को रोका जा सकेगा और नए टीकों को तेजी से लाने में भी प्रभावी रूप से मदद मिलेगी. न केवल COVID टेस्‍ट जारी रखना महत्वपूर्ण है, बल्कि जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए नमूनों का एक छोटा प्रतिशत भेजना और उस डेटा को जन जागरूकता के लिए जारी करना महत्वपूर्ण है.

इसे भी पढ़ें: सुंदरबन के दूरस्थ और दुर्गम द्वीपों में स्वास्थ्य सेवा दे रहे हैं बोट क्लीनिक

NDTV: COVID-19 महामारी अभी खत्म नहीं हुई है. COVID-19 से सीखते हुए, भविष्य की महामारियों से खुद को बचाने के लिए भारत को क्या कदम उठाने चाहिए?

डॉ. संदीप बुद्धिराजा: COVID-19 आखिरी महामारी नहीं है. आगे बढ़ते हुए, भारत को जनशक्ति, बुनियादी ढांचे, संसाधनों और प्रशिक्षण में निवेश करने की आवश्यकता है. हेल्‍थ केयर बजट के आवंटन को बढ़ाने की जरूरत है, और जो नए अस्पताल आने वाले हैं उन्हें बुनियादी ढांचे और जनशक्ति के मामले में किसी भी महामारी से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए. इसके अतिरिक्त, जनशक्ति को संक्रामक रोग प्रोटोकॉल पर प्रशिक्षित और अद्यतन किया जाना चाहिए. नियमित प्रशिक्षण महत्वपूर्ण है. हमें इन सभी चीजों में निवेश करने की जरूरत है.

हमें सार्वजनिक-निजी भागीदारी पर भी ध्यान देने की जरूरत है. हम पूरी तरह से सरकार पर जिम्मेदारी नहीं डाल सकते. निजी स्वास्थ्य देखभाल, मेडिकल कॉलेज, सरकारी अस्पताल, गैर सरकारी संगठन और सामान्य चिकित्सक जिनके अपने क्लीनिक हैं – सभी को एक एकीकृत बल होना चाहिए.

NDTV: इटली ने 60 साल से अधिक लोगों को दूसरी COVID बूस्टर खुराक देना शुरू कर दिया है. क्या भारत को भी इसके बारे में सोचना चाहिए?

डॉ. संदीप बुद्धिराजा: मुझे नहीं लगता कि भारत अभी ऐसी स्थिति में है जहां हमें दूसरे बूस्टर डोज की सिफारिश शुरू करनी चाहिए. अभी प्राथमिकता यह है कि लोग टीकाकरण के दो बुनियादी डोज ले लें और फिर पहली बूस्टर खुराक लें.

याद रखें, हमें वायरस ट्रांसमिशन की गतिशीलता को समझना जारी रखना होगा. यह वायरस अभी भी कम्युनिटी में है और यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल रहा है. हम अब कभी भी लॉकडाउन में जाने के चरण में नहीं होंगे, इसलिए, उम्मीद है कि जीवन वही होगा जो पहले हुआ करता था, लेकिन एक नए तरीके से. जब आप भीड़-भाड़ वाली जगहों, भीड़भाड़ वाले कमरों में हों, तो सुनिश्चित करें कि आपने मास्क पहना है, सामाजिक दूरी बनाए रखें और बार-बार हाथ धोएं. यदि हम इन बुनियादी सिद्धांतों का पालन करते हैं, तो हम महीनों या वर्षों में वायरस के ट्रांसमिशन को धीमा कर देंगे, क्योंकि दुनिया की पूरी आबादी का इम्‍यूनिटी लेवल बार-बार टीकाकरण और नेचुरल इंफेक्‍शन के साथ बेहतर होता जा रहा है, कुल मिलाकर, महामारी धीरे-धीरे खत्‍म होने की ओर बढ़ेगी.

इसे भी पढ़ें: मुंबई में एक महीने से भी कम समय में डेली COVID केस 1000 प्रतिशत बढ़े

अब आप बनेगा स्‍वस्‍थ इंडिया हिंदी पॉडकास्‍ट डिस्‍कशन सुन सकते हैं महज ऊपर एम्बेड किए गए स्‍पोट‍िफाई प्लेयर पर प्ले बटन दबाकर.

हमें एप्‍पल पॉडकास्‍ट और गूगल पॉडकास्‍ट पर फॉलो करें. साथ ही हमें रेट और रिव्‍यू करें.

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Highlights: Banega Swasth India Launches Season 10

Reckitt’s Commitment To A Better Future

India’s Unsung Heroes

Women’s Health

हिंदी में पढ़ें

This website follows the DNPA Code of Ethics

© Copyright NDTV Convergence Limited 2024. All rights reserved.