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महिलाओं को ब्रेस्टफीडिंग और वर्किंग लाइफ के बीच तालमेल बैठाने के लिए सुपर पावर की जरूरत नहीं होनी चाहिए: WHO

WHO का सुझाव है कि मां का दूध शिशुओं के लिए सबसे अच्छा आहार है क्योंकि यह सुरक्षित, स्वच्छ होता है और इसमें एंटीबॉडी होते हैं जो बचपन में होने वाली कई बीमारियों से उनकी रक्षा करने में मदद करते हैं

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महिलाओं को ब्रेस्टफीडिंग और वर्किंग लाइफ के बीच तालमेल बैठाने के लिए सुपर पावर की जरूरत नहीं होनी चाहिए: WHO
विश्व स्तनपान सप्ताह (World Breastfeeding Week) जो हर साल अगस्त के पहले सप्ताह यानी 1-7 अगस्त तक मनाया जाता है, का मकसद लोगों के बीच स्तनपान के महत्व को लेकर जागरूकता पैदा करना और स्तनपान दरों को बढ़ाना है

नई दिल्ली: विश्व स्तनपान सप्ताह (World Breastfeeding Week) जो हर साल अगस्त के पहले सप्ताह यानी 1-7 अगस्त तक मनाया जाता है, का मकसद लोगों के बीच स्तनपान के महत्व को लेकर जागरूकता पैदा करना और स्तनपान दरों को बढ़ाना है. इस साल यह हफ्ता “Let’s make breastfeeding at work, work” की थीम के साथ मनाया जा रहा है. 1 अगस्त को विश्व स्तनपान सप्ताह की शुरुआत पर वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने सोशल मीडिया पर एक ग्राफिक शेयर किया, जिसमें एक महिला को कपड़े की एक फैक्ट्री में स्तनपान कराते और काम करते हुए दिखाया गया है. ग्राफिक में वो बच्चे को अपने दोनों हाथों में पकड़ कर उसे स्तनपान करा रही है, उसके तीन हाथ और दिखाए गए हैं, जिसमें धागा, कैंची और कपड़ा है.

WHO ने इस इमेज के शीर्षक में लिखा है, “महिलाओं को ब्रेस्टफीडिंग और काम के बीच तालमेल बैठाने के लिए सुपर पावर की जरूरत नहीं होनी चाहिए” और कुछ तरीके सुझाए हैं जिनसे माताओं को सपोर्ट किया जा सकता है. हर ऑफिस में सभी माताओं को, चाहे उनका काम या कॉन्ट्रेक्ट जिस भी तरह का हो, उन्हें ये सुविधाएं मिलनी चाहिए:

  • कम से कम 18 सप्ताह, 6 महीने या उससे अधिक, पेड मैटरनिटी लीव
  • काम पर लौटने पर स्तनपान कराने या दूध निकालने के लिए समय
  • काम पर वापसी के फ्लेक्सिबल ऑप्शन

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स्तनपान कराते हुए क्या करें और क्या न करें:

माताओं के लिए स्तनपान के दौरान क्या करें और क्या न करें के बारे में WHO और यूनिसेफ ने कुछ सलाह दी हैं:

  • जन्म के एक घंटे के भीतर बच्चे को स्तनपान कराना शुरू करें
  • बच्चों को पहले 6 महीनों तक केवल स्तनपान कराना चाहिए. इसका मतलब है कि बच्चे को कोई खाद्य पदार्थ या तरल पदार्थ यहां तक की पानी भी नहीं दिया जाना चाहिए
  • शिशु की मांग पर स्तनपान कराना चाहिए – यानी जितनी बार बच्चा दिन या रात में चाहे. किसी भी बोतल, टीट (teats) या पैसिफायर का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए
  • 6 महीने की उम्र से बच्चे को आहार देना शुरू करें और दो साल या उससे अधिक की उम्र तक उसे स्तनपान कराना जारी रखें

स्तनपान का महत्व:

स्तनपान बच्चे की हेल्थ अच्छी रखने के सबसे प्रभावी तरीकों में से एक है. WHO का सुझाव है कि मां का दूध शिशुओं के लिए सबसे अच्छा आहार है क्योंकि यह सुरक्षित, स्वच्छ होता है और इसमें एंटीबॉडी होते हैं जो बचपन में होने वाली कई बीमारियों से उनकी रक्षा करने में मदद करते हैं.

मां का दूध शिशु के शुरुआती महीनों में उसे जितनी ऊर्जा और पोषक तत्व की जरूरत होती है वो प्रदान करता है, और यह पहले साल की दूसरी छमाही के दौरान बच्चे की पोषण संबंधी जरूरतों का आधा या उससे अधिक और दूसरे साल के दौरान एक तिहाई तक प्रदान करता रहता है.

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ब्रेस्टफीडिंग के हेल्थ बेनिफिट के बारे में बताते हुए, WHO का कहना है,

स्तनपान करने वाले बच्चे बुद्धिमत्ता के टेस्ट में बेहतर प्रदर्शन करते हैं, उनमें मोटापे की संभावना कम होती है और बाद की जिंदगी में उन्हें डायबिटीज होने की संभावना कम होती है. साथ ही जो महिलाएं स्तनपान कराती हैं उनमें ब्रेस्ट और ओवेरियन कैंसर होने का खतरा कम होता है.

ब्रेस्टफीडिंग और काम:

WHO के मुताबिक वर्तमान में, 50 करोड़ से ज्यादा कामकाजी महिलाओं के पास जरूरी मैटरनिटी प्रोविजन तक पहुंच नहीं है; जब कई महिलाएं काम पर वापस आती हैं तो उन्हें जो सपोर्ट मिलना चाहिए वो नहीं मिलता. एम्प्लॉयर्स और कलीग यानी सहकर्मी अपनी कंपनी और टीम में नई माताओं को किस तरह सपोर्ट कर सकते हैं इस पर WHO ने कहा:

  • मैटरनिटी लीव देकर
  • स्तनपान कराने या स्तन के दूध को निकालने और स्टोर करने के लिए समय और जगह देकर
  • ऐसे ऑप्शन प्रोवाइड करके जो मैटरनिटी लीव के बाद काम पर लौटी महिलाओं का अपने बच्चों से सैपरेशन कम करें, जैसे:
    – फ्लेक्सिबल वर्क शेड्यूल
    – साइट पर बच्चों की देखभाल की सुविधा
    – टेली वर्किंग
    – पार्ट टाइम वर्क
    – माताओं को अपने बच्चों को काम पर लाने की इजाजत देकर

सहकर्मियों को क्या करना चाहिए:

  • जब महिलाएं काम पर लौटें तो उनके फ्लेक्सिबल वर्क अरेंजमेंट को सपोर्ट करें
  • वर्कप्लेस पर महिलाओं के अधिकारों की हिमायत करना

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