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जानें क्या है पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD)?, लक्षण और बचाव

संयुक्त राज्य अमेरिका के रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) ने PTSD को उस घटना के विचारों और चेतावनी के लिए एक तीव्र शारीरिक और भावनात्मक प्रतिक्रिया के रूप में परिभाषित किया है, जो दर्दनाक घटना के बाद कई हफ्तों या महीनों तक चलती है

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Mental Health Explained What Is Post-traumatic Stress Disorder

नई दिल्ली: मुंबई के मनोचिकित्सक डॉ. हरीश शेट्टी ने बताया, “मेरे क्लाइंट्स में से एक सर्जन और कोविड-19 से ठीक हुए एक मरीज है. कोविड-19 बीमारी के इलाज के लिए एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था और वहां रहने के दौरान उन्होंने इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) से बहुत सारे शवों को ले जाते हुए देखा. हालांकि वह कोविड-19 से उबर गए और जल्द ही घर वापस चले गए, लेकिन अस्पताल और शवों के दृश्य उनके दिमाग में छप गए. नतीजतन, उन्हें बुरे सपने आते, वह चिल्लाते और अपने बिस्तर से कूद जाते. यह साफतौर से एक पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) का केस है”

यूनाइटेड स्टेट्स सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) पीटीएसडी को उस घटना के विचारों और यादों के लिए एक तेज शारीरिक और भावनात्मक प्रतिक्रिया के रूप में परिभाषित करता है जो दर्दनाक घटना के बाद भी कई हफ्तों या महीनों तक चलती है.

यह उन लोगों में हो सकता है जिन्होंने प्राकृतिक आपदा, बलात्कार, गंभीर दुर्घटना, आतंकवादी हमला और युद्ध जैसी दर्दनाक घटनाओं को देखा या अनुभव किया हो. मुंबई के जसलोक हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की सलाहकार मनोवैज्ञानिक रितिका अग्रवाल ने कहा कि पीटीएसडी होने के लिए हमेशा एक दर्दनाक घटना होना ही पहला कारण नहीं हो सकता, लेकिन यह अप्रत्यक्ष भी हो सकता है जैसे कि जब कोई दर्दनाक घटना के विवरण के बारे में सुनता है.

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पीटीएसडी और कोविड-19 महामारी

फरवरी 2021 में, मनोरोग विभाग, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेस, ने ‘कोविड-19’ महामारी के समय में ‘मानसिक स्वास्थ्य’ पर मैनुअल के लिए एक अपडेट जारी किया, जिसे पहली बार अप्रैल 2020 में जारी किया गया था. रिपोर्ट के अनुसार, हॉस्पिटल क्वारंटाइन एक महत्वपूर्ण जीवन घटना हो सकती है और इसके परिणामस्वरूप एक कमजोर आबादी में एक्यूट स्ट्रेस डिसॉर्डर हो सकता है. हॉस्पिटल क्वारंटाइन के संपर्क में आने वाले व्यक्तियों में बाद में PTSD विकसित होने का जोखिम ज्यादा होता है.

ब्रीफ सायकोटिक डिसऑर्डर, एक्यूट स्ट्रेस डिसॉर्डर, एडजस्टमेंट डिसऑर्डर, ओबेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर, डिप्रेशन और एंग्जायटी डिसऑर्डर, ये सारे पोस्ट कोविड मनोरोग स्थितियां है. गंभीर तीव्र श्वसन रोग (SARS) कोविड, कोविड के बाद की मानसिक जटिलताओं के लिए सबसे मजबूत भविष्यवाणियों में से एक है. पिछले कोरोनावायरस प्रकोपों के साक्ष्यों के मेटा-विश्लेषण ने धीरे-धीरे ठीक होने के चरण के दौरान पीटीएसडी का प्रसार लगभग 33 प्रतिशत होने का सुझाव दिया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि सार्स से बचे लगभग आधे लोगों में पीटीएसडी के लक्षण थे.

अप्रैल 2020 के अंतिम सप्ताह के दौरान दिल्ली के वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्पताल के सामुदायिक चिकित्सा विभाग द्वारा किए गए 234 लोगों के एक सर्वे के अनुसार, भारत में लॉकडाउन के दौरान 28.2 प्रतिशत प्रतिभागी पीटीएसडी से पीड़ित थे. 13.7 प्रतिशत प्रतिभागियों के लिए पीटीएसडी स्कोर क्लीनिकल कंसर्न था, जबकि 8.1 प्रतिशत के लिए पीटीएसडी एक संभावित डायग्नोसिस था और 5.4 प्रतिशत के लिए यह इम्यून सिस्टम के कामकाज को दबाने के लिए काफी था.

डॉ शेट्टी के अनुसार, अगर 100 लोग किसी खास ट्रॉमा के संपर्क में आते हैं, तो उनमें से सात से आठ लोग पीटीएसडी का अनुभव कर सकते हैं.

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पीटीएसडी के लक्षण

अनचाही यादें और फ्लैशबैक

डॉ शेट्टी कहते है, जब कोई व्यक्ति कुछ अनुभव करता है, तो उसके दिमाग में भावनाओं के साथ-साथ एक छवि भी कैद हो जाती है. वह छवि इमेजरी बन जाती है जो याददाश्‍त में बदल जाती है और फिर यह शायद अनचाही याद भी बन सकती है. अनचाही याददाश्‍त का मतलब है फ्लैशबैक और खराब सपने के जरिए घटना को फिर से महसूस करना है, जिसके परिणामस्वरूप अनियंत्रित कंपकंपी, ठंड लगना, दिल में घबराहट होना और तनाव सिरदर्द हो सकता है.

घटना को याद करने से बचना

सुश्री अग्रवाल कहती हैं, दर्दनाक घटना को याद करने से बचना, जैसे की घटना के बारे में बात करने से- कुछ भी जो घटना की यादों को ट्रिगर कर सकता है वह पीटीएसडी का एक सामान्य लक्षण है.

अति सतर्कता और अति उत्तेजना

अति सतर्कता का अर्थ है अपने परिवेश के प्रति अत्यधिक जागरूक और सतर्क रहना और आसानी से चौंक जाना. इसका एक उदाहरण साझा करते हुए, डॉ शेट्टी कहती हैं, एक भयंकर भूकंप का अनुभव करने के बाद, जब लोग अस्थायी आश्रय घरों में रहते हैं, तो उनमें से कुछ ट्रक की आवाज़ से डर जाते हैं और वे भागने लगते हैं.

डॉ शेट्टी ने कहा, कोविड-19 के मामले में, आप एक डॉक्टर का चेहरा देखते हैं और जब आप अस्पताल में अपने ठहरने की फ्लैशबैक में जैसे जाते हैं तो आप वहां से भागने लगते हैं.

सीडीसी के अनुसार, बढ़ी हुई उत्तेजना के लक्षणों में अत्यधिक सतर्क या आसानी से चौंकना, सोने में परेशानी, चिड़चिड़ापन या तेज गुस्सा और एकाग्रता की कमी शामिल हैं.

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कमजोरी, भावनाओं को महसूस करने में परेशानी

यहां कमजोरी का अर्थ है किसी भी तरह की भावनाओं को महसूस करने में परेशानी- चाहे वह खुशी हो या दुःख. इसमें दूसरों से अलग महसूस करना और जिस एक्टिविटी को पहले करने में मजा आता हो उसमें रुचि कम होना शामिल है.

सीडीसी के फैक्टशीट में कहा गया है कि पीटीएसडी से जुड़े अन्य लक्षणों में पैनिक अटैक, डिप्रेशन, आत्महत्या के विचार और भावनाएं, नशीली दवाओं का सेवन, अलग होने और अलग-थलग रहने की भावनाएं और दैनिक कार्यों को पूरा करने में असक्षम होना शामिल हैं.

पीटीएसडी का निदान और उपचार

किसी व्यक्ति के पीटीएसडी के निदान के लिए, ऊपर दिए गए लक्षण, उन्हें लगभग एक महीने से अधिक समय तक होने चाहिए, और इन लक्षणों ने व्यक्ति के दैनिक कामकाज में महत्वपूर्ण संकट या कठिनाई पैदा की होगी. ज्यादातर लोग ऊपर दिए गए लक्षणों को दर्दनाक घटना के 3 महीने के भीतर अनुभव करते हैं, लेकिन कुछ में लक्षण घटना के तुरंत बाद भी शुरू हो सकते हैं. सुश्री अग्रवाल ने कहा कि पीटीएसडी महीनों और कभी-कभी सालों तक बनी रह सकती है, इसलिए इसका जल्द से जल्द इलाज करवाना जरूरी है.

पीटीएसडी के निदान के लिए लक्षणों के साथ, क्लिनिकल हिस्ट्री और मानसिक स्थिति की जांच की जाती है. बहुत कम ही, मनोवैज्ञानिक परीक्षण भी किए जाते हैं. इसके बाद, इलाज की योजना बनाई जाती है; इसमें साइकोथेरेपी या दवाएं या फिर दोनों ही शामिल हो सकते हैं.

सुश्री अग्रवाल ने बताया कि कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (सीबीटी), कॉग्निटिव प्रोसेसिंग थेरेपी (सीपीटी), लॉन्ग एक्सपोजर थेरेपी (पीई), और आई मूवमेंट डिसेन्सिटाइजेशन एंड रीप्रोसेसिंग (ईएमडीआर) थेरेपी पीटीएसडी के लिए कुछ प्रभावी थेरेपी हो सकते हैं.

डॉ शेट्टी का मानना है कि आध्यात्मिक गतिविधियां, माइंडफुलनेस और योग भी याददाश्त को भूलाने में मदद कर सकते हैं. जरूरी रूप से यादों को क्वारंटाइन करना ही लक्ष्य है. यहां थेरेपी ग्रुप भी अनुभव से बाहर निकालने में मदद कर सकते हैं.

इलाज का समय व्यक्ति पर निर्भर करता है लेकिन जितनी जल्दी इसका इलाज शुरू कर दिया जाए, यह उतना मददगार साबित हो सकता है. डॉ शेट्टी ने कहा कि मानसिक बीमारी को नियंत्रित करने में लगभग चार से 12 सप्ताह लग सकते हैं.

विशेषज्ञों का कहना है पीटीएसडी से जूझ रहे लोगों का मजबूती से बाहर आना तभी संभव हो सकता है, जब मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल द्वारा प्रदान की जाने वाली बाहरी मदद के साथ-साथ उन्हें परिवार और दोस्तों का भी पूरा सपोर्ट मिले.

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अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने डॉक्टर से सलाह लें. एनडीटीवी इस जानकारी की जिम्मेदारी नहीं लेता है.

यदि आपको मदद की जरूरत है या आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जिन्हें ऐसी कोई परेशानी है तो कृपया अपने निकटतम मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें.

आसरा: 91-9820466726 (24 घंटे)
स्नेहा फाउंडेशन: 91-44-24640050 (सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक उपलब्ध)
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