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Swachh Survekshan 2021: जानिए कैसे लगातार 5वें वर्ष भारत का सबसे स्वच्छ शहर बना इंदौर

इंदौर को लगातार पांच सालों के लिए सबसे स्वच्छ शहर का दर्जा दिया गया है, आइए जानते हैं कि वह अपने खिताब पर कैसे कायम रहा है.

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Swachh Survekshan 2021: जानिए कैसे लगातार 5वें वर्ष भारत का सबसे स्वच्छ शहर बना इंदौर
स्वच्छ सर्वेक्षण 2021 में मध्य प्रदेश के इंदौर को लगातार पांचवें वर्ष भारत के सबसे स्वच्छ शहर का खिताब दिया गया है.

नई दिल्ली: देश के शहरों और कस्बों में स्वच्छता, हाइजीन और सेनिटेशन स्वच्छता का वार्षिक सर्वेक्षण Swachh Survekshan 2021 के अनुसार मध्य प्रदेश के इंदौर को लगातार पांचवें वर्ष भारत के सबसे स्वच्छ शहर का खिताब दिया गया है. राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने शनिवार (20 नवंबर) को राजधानी में आयोजित एक समारोह में परिणामों की घोषणा की.

स्वच्छ सर्वेक्षण 2021 की लिस्‍ट में सूरत और विजयवाड़ा दूसरे और तीसरे सबसे स्वच्छ शहर बने, जबकि राज्यों में, छत्तीसगढ़ लगातार तीसरे साल टॉप पर रहा, इसके बाद महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के नाम थे.

अवॉर्ड देते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा,

इस साल इंदौर शहर ने लगातार पांचवीं बार पहला स्थान हासिल किया है. पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त करना काबिले तारीफ है, लेकिन इससे भी ज्यादा प्रशंसनीय बात यह है कि इंदौर लगातार पांच साल से इस स्थान पर कायम है.

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्यप्रदेश विशेषकर इंदौर की जनता को बधाई देते हुए कहा,

हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में, मध्य प्रदेश ने स्वच्छता के एक नए युग को पाया है. मुझे यह घोषणा करते हुए बहुत गर्व हो रहा है कि इंदौर एक बार फिर टॉप पर है. मध्यप्रदेश को इस वर्ष के स्वच्छ सर्वेक्षण पुरस्कारों में 35 पुरस्कार प्राप्त हुए हैं. मैं राज्य के प्रत्येक नागरिक, नगर निगम के कर्मचारियों और अधिकारियों के सदस्यों को बधाई देना चाहता हूं, जिन्होंने यह सुनिश्चित किया है कि मध्य प्रदेश शीर्ष पर बना रहे.

केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी इंदौर की जनता को बधाई दी, उन्होंने कहा,

इंदौर लगातार 5वें साल भारत का सबसे स्वच्छ शहर है. शहर को शीर्ष पर रखने की दिशा में अनुकरणीय प्रतिबद्धता के लिए लोगों, राजनीतिक नेतृत्व, नगर निगम, स्वच्छाग्रहियों और सफाईमित्रों को हार्दिक बधाई.

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एक नज़र कैसे इंदौर ने अपना खिताब बरकरार रखा

इंदौर मध्य प्रदेश राज्य का सबसे बड़ा शहर है. शहर 2017 के बाद से हर साल शीर्ष रैंक जीतने में कामयाब रहा है. इंदौर ने अपनी स्थिति बरकरार रखी है क्योंकि हर साल शहर अपने पिछले खिताब को बनाए रखने और आगे बढ़ने और शहर को अधिक टिकाऊ, हरा और पर्यावरण के अनुकूल बनाने का प्रबंधन करता है. इंदौर नगर निगम पिछले कुछ वर्षों से पूरे शहर को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) और लैंडफिल मुक्त बनाने के बाद स्रोत पर अपशिष्ट प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित कर शहर को स्वच्छ बना रहा है. नगर निगम का एजेंडा कचरे का पुनर्चक्रण, पुन: उपयोग और निपटारा तेजी से और अधिक संगठित तरीके से करना है.

शहर अब घरेलू/वाणिज्यिक स्तर पर कचरे के सिक्‍स-बिन सेग्रीगेशन पर है, जिसमें सूखा कचरा, गीला कचरा, प्लास्टिक कचरा, ई-कचरा, घरेलू स्वच्छता अपशिष्ट और घरेलू खतरनाक कचरे के लिए अलग-अलग डिब्बे शामिल हैं.

इंदौर की पहल के बारे में NDTV से बात करते हुए, इंदौर नगर निगम के केंद्र के स्वच्छ भारत अभियान के सलाहकार असद वारसी ने कहा,

शहर के लोगों के विश्वास और सहयोग के कारण हम भारत के सबसे स्वच्छ शहर का खिताब बरकरार रखने में सफल रहे हैं. इस पहल के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, इंदौर ने जिन प्रमुख फोकस क्षेत्रों की शपथ ली है उनमें से एक कचरा प्रबंधन है.

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वारसी ने आगे कहा,

औसतन, शहर द्वारा प्रतिदिन 530 टन गीला कचरा, 460 टन सूखा कचरा, 14 टन प्लास्टिक कचरा, 2.5 टन ई-कचरा, 11 टन सैनिटरी कचरा और 3.5 टन खतरनाक कचरा पैदा होता है. शहर में हर तरह के कचरे से निपटने के लिए हमने अलग व्यवस्था बनाई है. शहर स्रोत पर ही अपशिष्ट उत्पादन को खत्म करने की रणनीतियों पर भी काम कर रहा है और चार वार्डों को जीरो-वेस्‍ट वार्ड के रूप में स्थापित करने में सक्षम है.

आगे यह बताते हुए कि शहर की अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली कैसे काम करती है, वारसी ने कहा,

नगर निगम द्वारा इकठ्ठा किए गए कचरे को ढके हुए वाहनों में ले जाया जाता है और उसी दिन 100 प्रतिशत कचरे का परिवहन और प्रसंस्करण किया जाता है. आईएमसी ने अपने गीले कचरे को संसाधित करने के लिए कई गीले अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्र भी स्थापित किए हैं. इंदौर गीले कचरे से निपटने के उद्देश्य से कचरे को ऊर्जा में बदलने की पहल भी कर रहा है. इतना ही नहीं वह जीवाश्म ईंधन पर शहर की निर्भरता को कम करने की कोशिश भी कर रहा है जो अधिक वायु प्रदूषण का कारण बनता है. आईएमसी द्वारा स्थापित अपशिष्ट से ऊर्जा संयंत्र गीले कचरे को मीथेन नामक 95 प्रतिशत शुद्ध बायोगैस में परिवर्तित करता है जिसे आगे सीएनजी (संपीड़ित प्राकृतिक गैस) में परिवर्तित किया जाता है.

अन्य तरीकों के बारे में बात करते हुए कि शहर अपने कचरे का प्रबंधन कैसे कर रहा है, वारसी ने कहा,

हमने गार्डन वेस्‍ट मैनेजमेंट की एक पहल भी की है जिसके तहत हर रोज लगभग 59 टन थोक गार्डन और बागवानी कचरे को संसाधित किया जा रहा है. आईएमसी कचरे से कम्पोस्ट बनाने के लिए मोबाइल कंपोस्टिंग इकाइयों का भी उपयोग करता है. हम लोगों को घरेलू खाद बनाने का अभ्यास करने के लिए भी प्रोत्साहित कर रहे हैं. वर्तमान में, शहर के 50,000 से अधिक परिवार अपने रसोई के कचरे को घर पर ही खाद बना रहे हैं. प्लास्टिक कचरे के संदर्भ में, आईएमसी कचरा संग्रह की एक अनूठी प्रणाली का पालन करता है, आईएमसी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी घरों को प्लास्टिक कचरे को अलग-अलग स्टोर करने के लिए दो बड़े बैग दिए गए हैं. जब एक बैग भर जाता है, तो लोग शहर में प्लास्टिक कचरे के पुनर्चक्रण के लिए नियुक्त एजेंसी को एक मैसेज भेजते हैं. एजेंसी अपने कर्मियों को उनके घर से प्लास्टिक खरीदने के लिए भेजती है, जिसकी न्यूनतम कीमत 1.5 रु प्रति किलोग्राम तक और प्लास्टिक की गुणवत्ता के आधार पर 5 प्रति किलो है. इस प्रकार, आईएमसी न केवल इस प्रक्रिया के साथ प्लास्टिक कचरे के परिवहन और हैंडलिंग पर बचत कर रहा है, बल्कि यह लोगों को उनके स्क्रैप किए गए प्लास्टिक उत्पादों से लाभ प्राप्त करने में भी मदद कर रहा है.

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इन सबके साथ-साथ इंदौर को भारत के पहले “वाटर प्लस” शहर का टैग भी दिया गया है, जो एक शहर को उसके प्रशासन के तहत नदियों और नालों में स्वच्छता बनाए रखने के लिए दिया गया एक सर्टिफिकेट है. स्वच्छ भारत मिशन के दिशा-निर्देशों के अनुसार, जब घरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से निकलने वाले सभी अपशिष्ट जल को पर्यावरण में उपचारित में छोड़ने से पहले संतोषजनक स्तर पर उपचारित किया जाता है, तो एक शहर को वाटर प्लस घोषित किया जा सकता है.

Swachh Survekshan 2021 के बारे में

इस साल, स्वच्छ सर्वेक्षण 2021 में, शहरों को तीन व्यापक मापदंडों के आधार पर रैंक किया गया है – सेवा स्तर की प्रगति, नागरिकों की आवाज और प्रमाणन. इन्‍हें कुल 8,600 पर आंका गया है. शहरों की रैंकिंग में, कचरे के अलग-अलग संग्रह, प्रसंस्करण, निपटान और स्थायी स्वच्छता के लिए अधिकतम भार – 40 प्रतिशत – दिया गया था. जबकि, कचरा मुक्त शहरों के लिए स्टार रेटिंग प्रोटोकॉल के तहत नागरिकों के फीडबैक को 30 प्रतिशत वेटेज और प्रमाणन को 30 प्रतिशत दिया गया.

इस साल, अवॉर्ड के रूप में, ‘Prerak DAUUR Samman’ नामक एक नई केटेगरी शुरू की गई थी, जिसमें कुल पांच एडिशनल सब-केटेगरी हैं, जो दिव्या (प्लैटिनम), अनुपम (स्वर्ण), उज्जवल (रजत), उदित (कांस्य) और आरोही (आकांक्षी) हैं. केटेगरी गीले, सूखे और खतरनाक श्रेणियों में कचरे के पृथक्करण के आधार पर, शहरों की स्वच्छता की स्थिति, लैंडफिल में जाने वाले कचरे का प्रतिशत और अन्य कारक के आधार पर तय की गई हैं. इस वर्ष, प्रेरक दौर सम्मान श्रेणी ने इंदौर, सूरत, नवी मुंबई, नई दिल्ली नगर परिषद और तिरुपति को ‘दिव्य’ (प्लैटिनम) श्रेणी में वर्गीकृत किया है.

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